‘जवाबी शुल्क से दवा कंपनियों को छूट वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं की अहम भूमिका को करती है उजागर’
निहारिका शोभना
- 03 Apr 2025, 09:54 AM
- Updated: 09:54 AM
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) भारतीय फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने दवा क्षेत्र को जवाबी शुल्क से छूट दी है, जो वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए उच्च शुल्कों का मुकाबला करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए करीब 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। उन्होंने भारत पर 27 प्रतिशत जवाबी शुल्क की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिकी वस्तुओं पर भारत उच्च आयात शुल्क वसूलता है।
हालांकि, दवा कंपनियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं को बढ़े हुए आयात शुल्क से छूट दी गई है।
जैन ने बयान में कहा कि यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा में लागत प्रभावी व जीवन रक्षक जेनेरिक दवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार संबंध हैं। वहीं ‘मिशन 500’ पहल के तहत व्यापार को दोगुना करके 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का साझा लक्ष्य है।
जैन ने कहा कि दवा क्षेत्र इस साझेदारी का आधार बना हुआ है, क्योंकि भारत किफायती दवाओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर वैश्विक और अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय दवा उद्योग दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें दवा आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन बढ़ाना और सभी की सस्ती दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करके राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना शामिल है।
आईपीए शीर्ष 23 भारतीय दवा कंपनियों का एक नेटवर्क है, जिसमें सन फार्मा, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, ल्यूपिन, टोरेंट और ग्लेनमार्क जैसी कंपनियां शामिल हैं।
भारत के सबसे बड़े औद्योगिक निर्यात दवा क्षेत्र के 2024 में 12.72 अरब अमरीकी डॉलर रहने का अनुमान है।
भाषा निहारिका