न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के स्कूलों में 25,753 शिक्षकों, अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध ठहराया
धीरज देवेंद्र
- 03 Apr 2025, 07:26 PM
- Updated: 07:26 PM
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार द्वारा संचालित और राज्य सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध करार दिया और पूरी चयन प्रक्रिया को ‘‘त्रुटिपूर्ण और विकृत’’ करार दिया।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने नियुक्तियों को रद्द करने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल, 2024 के फैसले को बरकरार रखा।
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा, ‘‘हमारे विचार से, यह ऐसा मामला है जिसमें पूरी चयन प्रक्रिया त्रृटिपूर्ण रही है, जिसे सुधारा नहीं जा सकता। बड़े पैमाने पर हेरफेर और धोखाधड़ी के साथ-साथ मामले को छिपाने के प्रयासों ने चयन प्रक्रिया को इतना नुकसान पहुंचाया गया है कि इसमें सुधार नहीं किया जा सकता।’’
कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को लेकर दाखिल 127 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘चयन की विश्वसनीयता और वैधता कम हो गई है, और तदनुसार, हमें इसे (उच्च न्यायालय के आदेश को) कुछ संशोधनों के साथ बरकरार रखना होगा।’’
फैसला सुनाते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जिन कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द की गई हैं, उन्हें अब तक अर्जित वेतन और अन्य भत्ते वापस करने की जरूरत नहीं है।
शीर्ष अदालत ने मानवीय आधार पर एक दिव्यांग कर्मचारी को भी छूट देते हुए कहा कि वह नौकरी में बनी रहेंगी।
पीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के उच्च न्यायालय के निर्देश को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के लिए चार अप्रैल की तारीख तय की है।
विस्तृत फैसले की प्रतीक्षा है।
शीर्ष अदालत ने 10 फरवरी को मामले से संबंधित कई याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और कहा कि जिन लोगों को गलत तरीके से नौकरी मिली है, उन्हें हटाया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 19 दिसंबर को अंतिम सुनवाई शुरू की और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रखने से पहले 15, 27 जनवरी और 10 फरवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनीं।
ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और अन्य अनियमितताओं का हवाला देते हुए उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में राज्य द्वारा संचालित और सरकारी-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य कर दिया था।
पिछले साल सात मई को शीर्ष अदालत ने राज्य के स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) द्वारा की गई नियुक्तियों को लेकर उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने सीबीआई को मामले की जांच जारी रखने की अनुमति दी।
यह मामला पश्चिम बंगाल एसएससी द्वारा आयोजित 2016 की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें 24,640 पदों के लिए 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे और कुल 25,753 नियुक्ति पत्र जारी किए गए थे।
शीर्ष अदालत ने इसे ‘‘व्यवस्थित धोखाधड़ी’’ करार दिया था।
पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और तृणमूल कांग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य एवं जीवन कृष्ण साहा भर्ती घोटाले में जांच के दायरे में आने वाले आरोपियों में शामिल हैं।
भाषा धीरज