लोस में तटीय पोत परिवहन विधेयक पारित, मछली पकड़ने को तटीय व्यापार की परिभाषा के बाहर रखा गया
सुभाष सुरेश
- 03 Apr 2025, 06:40 PM
- Updated: 06:40 PM
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ‘तटीय पोत परिवहन विधेयक, 2024’ के कुछ प्रावधानों पर विपक्षी सदस्यों की ओर से जताई गई चिंताओं को लेकर बृहस्पतिवार को कहा कि मछली पकड़ने को तटीय व्यापार की परिभाषा के दायरे से बाहर रखा गया है।
सोनोवाल ने विधेयक पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि अब तक समुद्री व्यापार में हमारे जहाजों की गतिविधियां कम रही हैं, कानून में उन्हें प्रोत्साहित करने की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘‘समुद्री क्षेत्र में हमारी शक्ति का सही दिशा में उपयोग करने के लिए यह विधेयक लाया गया।’’
यह विधेयक भारतीय तटीय जलक्षेत्र में व्यापार करने वाले जहाजों को विनियमित करने का प्रावधान करता है।
मंत्री के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
सोनोवाल ने अपने जवाब में कहा कि विधेयक पर चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने मछुआरों की सुरक्षा, आजीविका और कल्याण को लेकर बार-बार चिंता जताई थी।
मंत्री ने कहा, ‘‘मैं उल्लेख करना चाहता हूं कि यह विधेयक मछली पकड़ने को तटीय व्यापार की परिभाषा के दायरे से बाहर रखता है।’’
उन्होंने कहा कि समुद्र से माल ढुलाई पर्यावरण हितैषी है और यह हरित परिवहन को बढ़ावा देता है।
मंत्री ने कहा, ‘‘यह परिवहन का बहुत किफायती साधन है। समुद्र से माल ढुलाई पर 20 पैसा प्रति टन प्रति किलोमीटर, रेल से एक रुपया बीस पैसा से डेढ़ रुपया प्रति टन प्रति किमी, सड़क मार्ग के जरिये दो रुपये प्रति टन प्रति किमी से तीन रुपये प्रति टन प्रति किमी का खर्च आता है।’’
उन्होंने कहा कि ‘नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी’ की शुरुआत किये जाने के समय प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने कहा था कि माल ढुलाई पर लागत को दोहरे अंक से एकल अंक में लाने की जरूरत है।
सोनोवाल ने कहा, ‘‘आज सड़क मार्ग से करीब 66 प्रतिशत, रेल से 31 प्रतिशत, समुद्री मार्ग से केवल पांच प्रतिशत और नदी मार्ग से दो प्रतिशत माल ढुलाई होती है। इसलिए, माल ढुलाई को बढ़ाने के लिए हमें समुद्री माल ढुलाई को और लोकप्रिय बनाना होगा।’’
उन्होंने कहा कि इस तरह समुद्री वाणिज्य को बढ़ाने के लिए यह विधेयक लाया गया। मंत्री ने कहा, ‘‘यह हमारे पूरे तट क्षेत्र को अधिक व्यवहार्य बनाएगा, जहाजों के निर्बाध आवागमन को बढ़ावा देगा तथा रोजगार और आय का सृजन करेगा।’’
उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ में 40 प्रतिशत माल ढुलाई समुद्र तटों के जरिये होता है। हमारे यहां (यह आंकड़ा) केवल पांच प्रतिशत है। उन्होंने कहा, ‘‘समुद्री जलमार्ग का हमने अब तक सही इस्तेमाल नहीं किया है। इसका सही इस्तेमाल करने के लिए कानून लाने की जरूरत थी।’’
मंत्री ने कहा, ‘‘यह विधेयक नवगति का एक और उदाहरण है। यह सुधारों की दिशा में एक और कदम है। साथ ही, यह एक बार फिर भारत की प्राचीन समुद्री सर्वोच्चता को बहाल करने की दिशा में उठाया गया कदम है।’’
उन्होंने कहा कि देश की तटरेखा 11,098 किलोमीटर लंबी है, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इस क्षेत्र (समुद्री माल ढुलाई) की पूरी तरह से अनदेखी की। उन्होंने कहा कि देश की 15 प्रतिशत से अधिक आबादी तटीय जिलों में रहती है तथा 42 प्रतिशत आबादी यानी करीब 60 करोड़ लोग तटीय राज्यों व क्षेत्रों में रहते हैं।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक राष्ट्र की समुद्री परिवहन की अपार क्षमता का उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
मंत्री ने मंगलवार को विधेयक को विचार एवं पारित करने के लिए लोकसभा में पेश किया था।
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