ट्रंप ने भारत पर 27 प्रतिशत शुल्क लगाया; किया जा रहा इसके परिणामों का अध्ययन
अनुराग अजय
- 03 Apr 2025, 08:13 PM
- Updated: 08:13 PM
(फाइल फोटो के साथ)
वाशिंगटन/नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को माल निर्यात करने वाले सभी देशों पर सार्वभौमिक शुल्क लगा दिया है तथा भारत जैसे देशों पर अतिरिक्त भारी शुल्क लगा दिया है, जिससे विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में झींगा से लेकर इस्पात तक के उत्पादों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका ने भारत से आयातित सभी वस्तुओं पर 27 प्रतिशत का भारी शुल्क लगा दिया है, जिसमें फार्मास्युटिकल्स, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और कुछ खनिज पदार्थ शामिल नहीं हैं। ये उत्पाद अमेरिका में उपलब्ध नहीं हैं। अमेरिका ने भारत को अनुचित व्यापार प्रथाओं का ‘सबसे खराब अपराधी’ बताते हुए उस पर शुल्क लगाया है।
अमेरिका को झींगा, कालीन, चिकित्सा उपकरण और सोने के आभूषण जैसे उत्पादों का निर्यात प्रभावित होगा। दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और फार्मा के निर्यात को उसके प्रतिस्पर्धी देशों पर बढ़त मिलेगी।
ऊर्जा को शुल्क से छूट देने का मतलब यह भी होगा कि भारत अमेरिका को गैसोलिन और गैसोलीन जैसे ईंधन का निर्यात जारी रख सकता है।
शुल्क से छूट प्राप्त सामान भारत से अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत है।
भारत सरकार ने सतर्कतापूर्वक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि वह घोषणाओं के ‘प्रभावों की सावधानीपूर्वक जांच कर रही है’ तथा अमेरिकी व्यापार नीति में इस फैसले के कारण उत्पन्न होने वाले अवसरों का भी अध्ययन करेगी।
ट्रंप ने सभी व्यापारिक साझेदारों से आयात पर 10 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त मूल्यानुसार शुल्क लगाने की घोषणा की। भारत पर 10 प्रतिशत का आधारभूत शुल्क पांच अप्रैल से और अतिरिक्त 27 प्रतिशत शुल्क नौ अप्रैल से प्रभावी होगा।
यह 27 प्रतिशत शुल्क, अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय उत्पादों पर वर्तमान में लागू किसी भी शुल्क के अतिरिक्त होगा।
हालांकि, इस कदम से अमेरिका को भारत की कुछ वस्तुओं के निर्यात पर असर पड़ सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। इनमें बांग्लादेश (37 प्रतिशत), चीन (54 प्रतिशत), वियतनाम (46 प्रतिशत) और थाइलैंड (36 प्रतिशत) शामिल हैं, जिन्हें बढ़े हुए शुल्कों का सामना करना पड़ रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए उच्च शुल्कों का मुकाबला करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए लगभग 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की।
ट्रंप ने बुधवार को राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस के रोज़ गार्डन में कहा, “यह मुक्ति दिवस है, एक लंबे समय से प्रतीक्षित क्षण। दो अप्रैल, 2025 को हमेशा उस दिन के रूप में याद किया जाएगा, जिस दिन अमेरिकी उद्योग का पुनर्जन्म हुआ, जिस दिन अमेरिका की नियति को पुनः प्राप्त किया गया, और जिस दिन हमने अमेरिका को फिर से समृद्ध बनाना शुरू किया। हम इसे समृद्ध, अच्छा और समृद्ध बनाने जा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत पर लगाया गया शुल्क, अमेरिका पर लगाए गए शुल्क का आधा है। अमेरिका द्वारा भारत पर व्यापार और गैर-व्यापार बाधाओं और मुद्रा समायोजन को शामिल करने के बाद यह 52 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका अन्य देशों से मोटरसाइकिलों पर केवल 2.4 प्रतिशत शुल्क वसूलता है, लेकिन थाइलैंड और अन्य देश इससे कहीं अधिक दरें 60 प्रतिशत, भारत 70 प्रतिशत, वियतनाम 75 प्रतिशत, तथा अन्य देश इससे भी अधिक दरें वसूल रहे हैं।
पिछले साल (2024 में) अमेरिका के साथ भारत का माल व्यापार अधिशेष 46 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.2 प्रतिशत) था। प्रमुख फार्मा निर्यात को अभी छूट दी गई है, जबकि वाहन और कलपुर्जों पर कुछ दिन पहले ही 25 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। वित्त वर्ष 2023-24 में अमेरिका को भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात (लगभग 103 अरब डॉलर) पर भी कोई शुल्क प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत से अमेरिका को 12.7 अरब डॉलर का फार्मा निर्यात, कुल निर्यात का लगभग 14 प्रतिशत है।
इंजीनियरिंग सामान और विशेष रसायन सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं। भारत से अमेरिका को वाहन निर्यात सिर्फ 2.8 अरब डॉलर है, जो कुल निर्यात का लगभग तीन प्रतिशत है।
भारतीय रत्न एवं आभूषण क्षेत्र पहले से ही पिछले कुछ वर्षों से ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं, प्रयोगशाला में विकसित हीरे की प्रौद्योगिकी, विमुद्रीकरण और सोने की बढ़ती कीमतों के कारण संघर्ष कर रहा है। अब इस क्षेत्र पर अमेरिकी शुल्क के कारण अतिरिक्त प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा, जिससे नौकरियां जाने और मार्जिन घटने का जोखिम बढ़ जाएगा।
रत्न एवं आभूषण निर्यात 11.5 अरब डॉलर या अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 13 प्रतिशत है।
कपड़ा क्षेत्र में भारत को बढ़त मिल सकती है क्योंकि उसके प्रतिद्वंद्वी बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया, पाकिस्तान, चीन और श्रीलंका पर ऊंचे शुल्क लगाए गए हैं। अमेरिका भारत से 36 अरब डॉलर से अधिक का कपड़ा खरीदता है, जो भारत के निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है।
भारत, अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर काम कर रहा है, जिसे 2025 के अंत तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। संभवतः अमेरिका से रक्षा और तेल/गैस का अधिक आयात एक अनुकूल संधि पर बातचीत करने में मदद कर सकता है, लेकिन कृषि आयात शुल्क को कम करने का दबाव एक राजनीतिक मुद्दा हो सकता है।
विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका द्वारा अत्यधिक उच्च जवाबी शुल्क लगाए जाने से वैश्विक और अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में कमी आएगी तथा वैश्विक और अमेरिकी मुद्रास्फीति में वृद्धि होगी।
वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि पारस्परिक रूप से लाभकारी, बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को शीघ्रता से संपन्न करने के लिए भारतीय और अमेरिकी व्यापार टीमों के बीच चर्चा जारी है।
लेकिन इस सौदे को पूरा होने में कम से कम कुछ महीने लग सकते हैं।
बीटीए में आपूर्ति शृंखला एकीकरण को गहरा करने सहित आपसी हितों के कई मुद्दे शामिल होंगे।
जारी वार्ता दोनों देशों को व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण बढ़ाने में सक्षम बनाने पर केंद्रित है।
मंत्रालय ने कहा, “हम इन मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में इन्हें आगे बढ़ाने की उम्मीद करते हैं।”
इसमें कहा गया है कि भारत अमेरिका के साथ अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को महत्व देता है और दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जहां वित्तीय सेवा कंपनी मैक्वेरी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 6.7 प्रतिशत के जीडीपी अनुमान में गिरावट का जोखिम है, वहीं मॉर्गन स्टेनली ने चालू वित्त वर्ष के लिए 6.5 प्रतिशत के अपने वृद्धि अनुमान में 0.30-0.60 प्रतिशत की गिरावट का जोखिम देखा।
इक्रा लिमिटेड की मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसंधान प्रमुख अदिति नायर ने कहा कि शुल्क घोषणाओं का प्रभाव कुछ क्षेत्रों जैसे इस्पात, अलौह धातुओं, वाहन कलपुर्जों और कटे और पॉलिश किए गए हीरे के लिए नकारात्मक है।
भारत से आने वाले सामान पर पहले से ही इस्पात, एल्युमीनियम और वाहन पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया जा रहा है। शेष उत्पादों के लिए, भारत पांच से आठ अप्रैल के बीच 10 प्रतिशत के बुनियादी शुल्क के अधीन है। उसके बाद, नौ अप्रैल से शुल्क बढ़कर 27 प्रतिशत तक हो जाएगा।
अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने के बारे में बताते हुए एक अधिकारी ने कहा कि यदि उत्पाद ‘ए’ पर वर्तमान में अमेरिका में पांच प्रतिशत शुल्क लगता है, तो पांच अप्रैल को यह 15 प्रतिशत और नौ अप्रैल से 32 प्रतिशत हो जाएगा।
अधिकारी ने कहा कि ये शुल्क ‘मिश्रित परिणाम हैं, कोई झटका नहीं’ तथा वाणिज्य मंत्रालय इस जवाबी शुल्क के प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है।
भाषा अनुराग