प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमा की सैन्य सरकार के प्रमुख से मुलाकात की, और भूकंप सहायता की पेशकश
धीरज पवनेश
- 04 Apr 2025, 05:48 PM
- Updated: 05:48 PM
(सागर कुलकर्णी)
बैंकाक, चार अप्रैल (भाषा)प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को म्यांमा की मौजूदा सैन्य सरकार के प्रमुख वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत हाल में आए भूकंप से तबाह पड़ोसी देश की और अधिक मदद करने को तैयार है। उन्होंने इसके साथ ही म्यांमा संघर्ष के समाधान के लिए ‘विश्वसनीय और समावेशी चुनाव’ पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक (बहु-क्षेत्रीय और तकनीकी सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) के नेताओं की शिखर बैठक से इतर म्यांमा की सैन्य सरकार के प्रमुख से मुलाकात की।
यह प्रधानमंत्री मोदी की वरिष्ठ जनरल मिन के साथ पहली बातचीत थी, जो फरवरी 2021 में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई आंग सान सू की की सरकार का तख्तापलट कर सत्ता में आए थे।
दोनों नेताओं की 35 मिनट की बैठक का एक बड़ा हिस्सा ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ पर केंद्रित था, जिसे भारत ने 28 मार्च को म्यांमा में आए 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप के बाद राहत कार्यों के लिए शुरू किया है। इस भूकंप में 3,100 से अधिक लोग मारे गए हैं।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यहां संवाददाताओं को बताया, ‘‘प्रधानमंत्री ने विश्वसनीय और समावेशी चुनावों सहित म्यांमा में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शीघ्र बहाली के महत्व को भी रेखांकित किया।’’
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमा के नेता से कहा कि भारत पूर्व की तरह विश्वास को बढ़ावा देने तथा ‘‘शांतिपूर्ण, स्थिर और लोकतांत्रिक म्यांमा की दिशा में म्यांमा द्वारा और म्यांमा के नेतृत्व में किये जाने वाले बदलाव ’’ के सभी प्रयासों का समर्थन करेगा।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक म्यांमा में जारी जातीय हिंसा से मानवीय क्षति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी शांति केवल समावेशी वार्ता के जरिए ही प्राप्त की जा सकती है।
मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान म्यांमा के वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की। हाल में आए भूकंप के कारण हुई जान-माल की हानि पर एक बार फिर संवेदना व्यक्त की। भारत इस कठिन समय में म्यांमा के अपने भाइयों और बहनों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने भारत और म्यांमा के बीच द्विपक्षीय संबंधों, विशेषकर ‘कनेक्टिविटी’, क्षमता निर्माण, बुनियादी ढांचा विकास आदि क्षेत्रों पर भी चर्चा की।’’
सूत्रों ने बताया कि वरिष्ठ जनरल ने राहत सहायता के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।
उन्होंने गुजरात के भुज में आए भूकंप के बाद वहां किए गए पुनर्निर्माण कार्य और नेतृत्व के लिए भी मोदी की सराहना की तथा म्यांमा एवं अन्य देशों को इससे मिली सीख का भी जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने म्यांमा और थाईलैंड की सीमा पर सक्रिय साइबर ठगी गिरोहों से भारतीय नागरिकों को बचाने और वापस लाने में म्यांमा द्वारा दिए गए सहयोग की भी सराहना की।
दोनों नेताओं ने भारत-म्यांमा सीमा पर उग्रवादी समूहों की गतिविधियों, अंतरराष्ट्रीय अपराधों और सीमा पर मानव तस्करी के मामलों में सहयोग करने पर भी सहमति जताई।
इस बैठक के दौरान म्यांमा के शासक ने 28 मार्च को आए भूकंप के तुरंत बाद भारत द्वारा भेजी गई सहायता की सराहना की।
भारत ने मांडले में ‘सैन्य फील्ड अस्पताल’ बनाए हैं। म्यांमा प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी मांडले में भारत द्वारा स्थापित अस्पताल का दौरा किया।
भारत के 250 कर्मी म्यांमा में एक फील्ड अस्पताल का संचालन कर रहे हैं तथा भूकंप के केन्द्र के पास सबसे अधिक प्रभावित मांडले क्षेत्र में राहत एवं पुनर्वास प्रयासों में मदद कर रहे हैं।
भारत ने अपने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के कर्मियों को भी तैनात किया है जो म्यांमा में राहत एवं बचाव कार्य में सहायता कर रहे हैं।
बिम्सटेक एक क्षेत्रीय पहल है जिसमें भारत के पड़ोसी देश थाईलैंड, म्यांमा, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और श्रीलंका शामिल हैं।
म्यांमा को बिम्सटेक की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। सदस्य देशों को जोड़ने वाली सभी प्रमुख परियोजनाएं म्यांमा से होकर गुजरती हैं, जहां स्थानीय प्रशासन का देश के विभिन्न क्षेत्रों पर बहुत कम नियंत्रण है।
म्यांमा में आए भीषण भूकंप ने उसे अन्य राष्ट्रों के साथ जुड़ने का अवसर दिया है, क्योंकि वह भूकंप से उबरने के लिए मानवीय सहायता चाहता है।
म्यांमा में पिछले सप्ताह आए भूकंप में करीब 3,100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, लगभग 5,000 लोग घायल हुए हैं और देशभर में 370 से ज्यादा लोग लापता हैं।
थाईलैंड के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बिम्सटेक सदस्यों ने बृहस्पतिवार को मंत्रिस्तरीय बैठकों के दौरान आपदा प्रबंधन पर चर्चा की।
चीन ने म्यांमा को भेजी गई सहायता की मात्रा का ब्योरा दिया है, जबकि भारत ने कहा है कि वह संकट के समय देशों को दी जाने वाली मानवीय सहायता के मौद्रिक मूल्य निर्धारण में विश्वास नहीं करता।
भाषा धीरज