'शहीद', 'उपकार', 'क्रांति' जैसी फिल्मों ने मनोज कुमार के करियर को परिभाषित किया
देवेंद्र सुरेश
- 04 Apr 2025, 09:29 PM
- Updated: 09:29 PM
नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार ने अपने करियर की शुरुआत रोमांटिक और थ्रिलर फिल्मों से की थी, लेकिन देशभक्ति विषय पर आधारित फिल्मों की ओर उनका रुझान उन्हें वास्तव में अमर बना गया।
कुमार का शुक्रवार को 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
यहां कुमार की विभिन्न शैलियों की 10 लोकप्रिय फिल्मों पर एक नजर डाली गई है, जिन्होंने अभिनेता के करियर को परिभाषित किया:
1. ‘‘हरियाली और रास्ता’’ (1962): यह फिल्म मनोज कुमार की सफल फिल्म थी। प्रेम, त्याग और कर्तव्य की कहानी पर आधारित इस रोमांटिक फिल्म में उनके साथ माला सिन्हा भी थीं। इस फिल्म का निर्देशन विजय भट्ट ने किया था।
2. ‘‘वो कौन थी?’’ (1964): राज खोसला द्वारा निर्देशित यह थ्रिलर फिल्म थी, और सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद एक बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसमें कुमार के साथ साधना ने अभिनय किया था।
3. ‘‘शहीद’’ (1965): यह फिल्म कुमार के करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह के रूप में एक भावुक और दिल को छू लेने वाला अभिनय किया था।
4. ‘‘गुमनाम’’ (1965): अगाथा क्रिस्टी के उपन्यास ‘‘एंड देन देयर वेयर नन’’ का रूपांतरण, ‘‘गुमनाम’’ हिंदी सिनेमा की थ्रिलर फिल्म थी। ‘‘गुमनाम’’ में मनोज कुमार ने एक रहस्यमयी हवेली में फंसे यात्रियों में से एक की भूमिका निभाई थी।
5. ‘‘उपकार’’ (1967): मनोज कुमार की निर्देशन में बनी यह पहली फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे ‘‘जय जवान जय किसान’’ से प्रेरित थी। फिल्म में कुमार ने भारत का किरदार निभाया था।
6. ‘‘पत्थर के सनम’’ (1967): वहीदा रहमान और मुमताज अभिनीत यह रोमांटिक फिल्म थी। इस फिल्म में मनोज कुमार ने जबरदस्त अभिनय कर दर्शकों का मन जीत लिया था।
7. ‘‘पूरब और पश्चिम’’ (1970): मनोज कुमार द्वारा निर्देशित और अभिनीत इस फिल्म में विदेशों में रहने वाले भारतीयों की पहचान संकट के बारे में बात की गई थी। इस फिल्म में अभिनेत्री सायरा बानो ने भी अभिनय किया था।
8. ‘‘शोर’’ (1972): ‘‘शोर’’ में एक विधुर पिता की गहरी भावनात्मक कहानी है जो अपने बेटे की आवाज को वापस लाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि यह फिल्म देशभक्ति से कम जुड़ी हुई है, लेकिन बलिदान, दृढ़ता और उम्मीद के इसके विषय कुमार की एक निर्देशक के रूप में बढ़ती परिपक्वता को दर्शाते हैं और इसमें अविस्मरणीय गीत ‘‘एक प्यार का नगमा है’’ शामिल है।
9. ‘‘रोटी कपड़ा और मकान’’ (1974): एक सामाजिक रूप से प्रेरित फिल्म जिसने बुनियादी मानवीय जरूरतों - भोजन, कपड़े और आश्रय से जुड़े मुद्दों पर भारत की प्रगति पर सवाल उठाया गया था। मनोज कुमार ने फिल्म लिखी, निर्देशित की और उसमें अभिनय किया, जिसमें उन्होंने अपने मंच का उपयोग समाज में बेरोजगारी और अमीर-गरीब के बीच के अंतर पर टिप्पणी करने के लिए किया।
10. ‘‘क्रांति’’ (1981): इस फिल्म में मनोज कुमार और दिलीप कुमार ने एक साथ काम किया, जिससे यह 1981 की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक बन गई।
भाषा
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