मप्र : बांधवगढ़ में बाघ सफारी का अभिन्न अंग बन रहे जंगली हाथी
सं दिमो प्रशांत धीरज
- 05 Apr 2025, 05:13 PM
- Updated: 05:13 PM
उमरिया (मध्यप्रदेश), पांच अप्रैल (भाषा) लगभग छह साल पहले पड़ोसी राज्यों से आए जंगली हाथी इंसानों के प्रति दोस्ताना व्यवहार कर रहे हैं और धीरे-धीरे मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) में सफारी के अनुभव का हिस्सा बन रहे हैं।
बीटीआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अधिकारी इन हाथियों को बीटीआर आने वाले पर्यटकों के लिए एक विशेषता के रूप में पेश करने पर विचार कर रहे हैं।
बीटीआर के उप निदेशक प्रकाश कुमार वर्मा ने कहा कि हम निकट भविष्य में सफारी के दौरान जंगली हाथियों को दिखाने की योजना बना रहे हैं।
शुरू में इंसानों से सावधान रहने वाले ये हाथी अब पर्यटकों के साथ दोस्ताना व्यवहार करने लगे हैं, जो रिजर्व के आकर्षण को बढ़ाता है।
इन हाथियों के आने की शुरुआत 2018-19 में हुई थी, जब लगभग 40 हाथी ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते आए थे। तब से उनकी संख्या में वृद्धि हुई है, और पिछले कुछ वर्षों में उनके व्यवहार में उल्लेखनीय बदलाव आया है।
वर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘पहले वे सफारी वाहनों का पीछा करते थे, जिससे आगंतुकों में चिंता पैदा होती थी।’’
उन्होंने कहा कि जब हाथी पहली बार आए, तो उनकी उपस्थिति ने स्थानीय लोगों और अधिकारियों दोनों को आश्चर्यचकित कर दिया।
वर्मा ने कहा,‘‘ग्रामीणों ने उन्हें भगाने के लिए शुरू में पटाखों का सहारा लिया, जिससे हाथी और भड़क गए और अधिक नुकसान हुआ।’’
बीटीआर के उप निदेशक ने कहा कि स्थिति से निपटने के लिए, बीटीआर ने स्थानीय लोगों को वैकल्पिक निवारक तरीकों को प्रशिक्षण देने के लिए दक्षिणी राज्यों, गैर सरकारी संगठनों और रिजर्व कर्मचारियों के विशेषज्ञों के साथ सहयोग किया।
उन्होंने कहा, ‘‘ग्रामीणों को पटाखों के बजाय मिर्च के धुएं या हर्बल उत्पादों का उपयोग करने के लिए कहा जाता है।’’उन्होंने कहा कि ‘‘समय के साथ, हाथियों और स्थानीय लोगों ने एक-दूसरे की उपस्थिति के साथ तालमेल बिठा लिया है।’’
इस प्रगति के बावजूद, बीटीआर ने पिछले अक्टूबर में एक दुखद घटना देखी, जब 10 हाथी मृत पाए गए। 29 और 31 अक्टूबर के बीच रिपोर्ट की गई मौतों ने वन्यजीव संरक्षण हलकों में चिंता पैदा कर दी।
बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके विसरा के नमूनों में साइक्लोपियाज़ोनिक एसिड की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जो दर्शाता है कि हाथियों ने खराब कोदो पौधे या अनाज खाए थे।
महीनों के दौरान, जंगली हाथी सफारी का हिस्सा बन गए। वे बीटीआर के मुख्य और बफर क्षेत्रों में घूम रहे हैं।
सत्रों के मुताबिक हाथियों के लिए समर्पित जल निकायों या आवासों को बनाने के लिए अभी तक कोई विशेष उपाय नहीं किए गए हैं, लेकिन अधिकारी उन्हें सफारी के अनुभव में शामिल करने के इच्छुक हैं।
भाषा सं दिमो प्रशांत