निवर्तमान डीयू छात्र संघ में एबीवीपी पदाधिकारियों ने पेश किया रिपोर्ट कार्ड
प्रशांत सुरेश
- 19 Aug 2025, 07:55 PM
- Updated: 07:55 PM
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के मौजूदा पदाधिकारियों ने मंगलवार को अपने कार्यकाल की रिपोर्ट पेश की, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के कार्यान्वयन, महिला सुरक्षा के उपायों और फीस वृद्धि के विरोध को प्रमुख पहल के तौर पर सूचीबद्ध किया गया।
सत्र 2025-26 के लिए डूसू चुनाव 18 सितंबर को होने हैं और मतगणना अगले दिन होगी।
विश्वविद्यालय के उत्तरी परिसर स्थित डूसू कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में सचिव मित्रविंदा कर्णवाल, उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, एबीवीपी की राष्ट्रीय सचिव शिवांगी खारवाल और दिल्ली राज्य सचिव सार्थक शर्मा ने पिछले वर्ष की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
पदाधिकारियों के अनुसार, छात्रसंघ ने एनईपी लागू करने, चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम की शुरुआत, पूर्वी और पश्चिमी परिसरों की नींव रखने तथा एक केंद्रीकृत छात्रावास आवंटन प्रणाली की स्थापना में भूमिका निभाई।
आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को मजबूत बनाने और “एक कोर्स-एक शुल्क” नीति को आगे बढ़ाने को भी उपलब्धियों में शामिल किया गया। नेताओं ने दावा किया कि 4,248 छात्र शिकायतों का सीधे डूसू कार्यालय से समाधान किया गया, जबकि ‘डूसू ऑन कैंपस’ अभियान के जरिये हजारों छात्रों तक पहुंच बनायी गई।
महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को मुख्य तवज्जो वाला क्षेत्र बताया गया।
एबीवीपी के प्रयासों में 24 घंटे चलने वाली वामिका हेल्पलाइन, कॉलेजों के बाहर महिला पीसीआर वैन की तैनाती, मिशन साहसी के तहत आत्मरक्षा प्रशिक्षण और ऋतुमती अभियान के तहत मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता अभियान शामिल थे।
उन्होंने कहा कि कई कॉलेजों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें पुनः स्थापित की गई हैं।
एबीवीपी के नेतृत्व वाले डूसू ने छात्रों के लिए प्रस्तावित एक लाख रुपये के बॉण्ड और अप्रत्यक्ष चुनाव कराने के प्रस्ताव का भी विरोध किया। पदाधिकारियों ने कहा कि यह कार्यकाल छात्र कल्याण सुनिश्चित करने और उन उपायों का विरोध करने के उनके प्रयास को दर्शाता है, जिन्हें वे मनमाना मानते हैं।
डूसू के 2024 के चुनावों में, कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई ने सात साल के अंतराल के बाद वापसी करते हुए दो प्रमुख पदों- अध्यक्ष और संयुक्त सचिव- पर जीत हासिल की थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित एबीवीपी ने उपाध्यक्ष पद हासिल किया और सचिव पद बरकरार रखते हुए छात्रसंघ में अपनी उपस्थिति बरकरार रखी।
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