अरुणाचल प्रदेश में सेना और वायु सेना का बहुविषयक युद्ध अभ्यास जारी
प्रचेता प्रशांत
- 13 Nov 2025, 07:11 PM
- Updated: 07:11 PM
ईटानगर, 13 नवंबर (भाषा) सेना, वायुसेना के समन्वय में, अरुणाचल प्रदेश के ऊँचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े एकीकृत बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास का संचालन कर रही है। एक रक्षा अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य तीनों सेनाओं की संयुक्त अभियानगत तैयारी और सटीक मारक क्षमता को परखना है।
सेना की तीसरी कोर के जनरल आफिसर कमांडिंग ले. जनरल अभिजीत एस पेंढारकर ने बृहस्पतिवार को इस अभ्यास की समीक्षा की और इसमें भाग लेने वाली टुकड़ियों द्वारा प्रदर्शित उत्कृष्ट तालमेल और परिचालन तत्परता की सराहना की है।
अधिकारी ने बताया कि 10 नवंबर से जारी इस अभ्यास की शुरुआत उन्नत निगरानी संसाधनों—जिनमें हेलिकॉप्टर, मानव रहित विमान (यूएवी), अंतरिक्ष-आधारित उपकरण और विशेष बलों की टीमें शामिल हैं—की तैनाती के साथ हुई। इसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों में निर्बाध निगरानी स्थापित करना और अभ्यास के तहत बनाए गए लक्ष्यों का पता लगाना था।
उन्होंने बताया कि यह अभ्यास 15 नवंबर को समाप्त होगा।
गुवाहाटी स्थित रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने कहा कि एक बार लक्ष्य का पता चलने पर, इन्हें लंबी दूरी की रॉकेट प्रणालियों, मध्यम तोपखाने, हथियारबंद हेलिकॉप्टरों, ‘स्वार्म’ ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन्स और कामिकेज ड्रोन सहित समन्वित संयुक्त मारक क्षमता के माध्यम से, इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप वाले वातावरण में निष्प्रभावी किया जा रहा है।
‘स्वार्म’ ड्रोन का मतलब एक ऐसी प्रणाली हैं जिसमें कई ड्रोन एक साथ, आपसी तालमेल के साथ किसी लक्ष्य पर हमला करने या निगरानी करने के लिए कार्य करते हैं।
वर्तमान में चल रहा यह अभ्यास पिछले साल नवंबर में हुए 'पूर्वी प्रहार' और इस साल मार्च में हुए 'प्रचंड प्रहार' नामक बहु-क्षेत्रीय अभ्यासों पर आधारित है जिसमें विमानन संपत्तियों के एकीकृत उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
प्रवक्ता ने बताया कि 'पूर्वी प्रचंड प्रहार' नामक यह अभ्यास को संयुक्त योजना, कमांड एवं नियंत्रण तंत्र और सेना, वायु सेना तथा अन्य सेवाओं के बीच निगरानी एवं प्रहार क्षमता वाले प्लेटफार्मों के एकीकृत उपयोग को मान्य करने के लिए बनाया गया है। यह अभ्यास संघर्ष के सभी पहलुओं और कार्यक्षेत्रों को शामिल करता है।
भाषा प्रचेता