सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा हुई, अब वे मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं: रीजीजू
/IANS
- 20 Aug 2026, 03:43 PM
- Updated: 03:43 PM
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने अरुणाचल प्रदेश में ''चीन की ओर से घुसपैठ'' के हालिया दावों को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा की जाती थी लेकिन अब ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ''सर्वोच्च प्राथमिकता'' हैं।
रीजीजू ने पूर्व रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी के 2013 में संसद में दिए उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि भारत में सीमावर्ती क्षेत्रों को अविकसित रखने की नीति लंबे समय तक अपनाई गई थी। हालांकि एंटनी ने तब यह भी कहा था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के सत्ता में आने से काफी पहले ही विभिन्न सरकारों ने इस नीति को छोड़ दिया था।
लोकसभा में अरुणाचल पश्चिम का प्रतिनिधित्व करने वाले रीजीजू की यह टिप्पणी अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में ''चीनी सैन्य गतिविधियों'' को लेकर नये सिरे से चिंता जताए जाने के बीच आई है।
रीजीजू ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''कुछ लोगों ने सीमा को लेकर यूं ही टिप्पणी कर दी। सीमावर्ती इलाके दुर्गम हैं, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मैं बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के लिए अरुणाचल प्रदेश के माजा, गालेमो और ताकसिंग इलाकों में गया था। सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा हुई लेकिन अब ये सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।''
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को लेकर कांग्रेस के रिकॉर्ड पर निशाना साधा।
रीजीजू ने कहा, ''कांग्रेस नेताओं में ए. के. एंटनी जी बहुत ईमानदार हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री रहते हुए संसद में स्वीकार किया था कि कांग्रेस सरकार की नीति सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा नहीं बनाने की थी।''
रीजीजू ने पूर्व रक्षा मंत्री एंटनी द्वारा छह सितंबर 2013 को लोकसभा में दिए गए बयान का उल्लेख किया। तत्कालीन रक्षा मंत्री ने उस समय स्वीकार किया था कि चीन ने सीमा पर भारत की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित किया है और उन्होंने इस मामले में भारत के पिछड़ने के लिए आजादी के बाद दशकों तक अपनाई गई नीति को जिम्मेदार ठहराया था।
एंटनी ने इस नीति के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए कहा था, ''आजादी के बाद कई वर्षों तक भारत में यह नीति रही कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास न करना ही सुरक्षा का सबसे बेहतर तरीका है। अविकसित सीमाएं विकसित सीमाओं की तुलना में अधिक सुरक्षित होती हैं इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों या हवाई पट्टियों का कई वर्षों तक निर्माण नहीं किया गया।''
उन्होंने कहा था, ''उस दौरान चीन अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का लगातार विकास करता रहा। नतीजतन वह अब हमसे आगे निकल गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और क्षमता के मामले में वे हमसे आगे हैं। मैं यह स्वीकार करता हूं। यह इतिहास का हिस्सा है।''
हालांकि एंटनी ने यह भी कहा था कि भारत को अपनी गलती का एहसास हो गया था और उनके 2013 के बयान से 20 से 25 साल पहले ही देश ने इस संबंध में अपना रुख बदल लिया गया था।
एंटनी ने कहा था, ''लेकिन पिछले 20-25 वर्षों में भारत की सरकारों को भी इस गलती का एहसास हुआ और उन्होंने नीति बदल दी। अब हम भी सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं... मैं बिना किसी अतिशयोक्ति के कह सकता हूं कि पिछले नौ वर्ष में संप्रग सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सबसे अधिक काम किया है। संप्रग के पहले और दूसरे कार्यकाल के दौरान यह काम किया जा रहा है। भविष्य में जो भी सरकार आएगी, वह भी इसे जारी रखेगी।''
रीजीजू ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश के भीतर 60 किलोमीटर तक घुस आए हैं। हालांकि उन्होंने स्थानीय निवासियों की चिंताओं को स्वीकार किया था।
रीजीजू ने 'एक्स' पर लिखा, ''भारत-चीन सीमा का मुद्दा गंभीर विषय है। ऐसे संवेदनशील मामले में झूठे दावे न करें। हम अतीत की गलतियां दोहराना नहीं चाहते। सरकार स्थानीय लोगों की चिंताओं का समाधान करेगी और भारतीय क्षेत्र की रक्षा करेगी।''
सीमा पर तनाव की खबरें सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चीन के साथ समग्र संबंधों के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा था, ''भारत और चीन के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े मामलों में हमने चीनी पक्ष के साथ बातचीत के दौरान हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि हम इन मुद्दों को बेहद गंभीर मानते हैं।''
उन्होंने कहा था, ''हमने यह भी कहा है कि सीमा से जुड़े मामलों की स्थिति हमारे व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति पर भी असर डालेगी।'' उन्होंने कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना ''अत्यंत महत्वपूर्ण'' है।
भाषा