ओडिशा: जगतपुरसिंह प्रशासन ने संदिग्ध बांग्लादेशियों को आश्रय देने के लिए बनाए गए मकान को ध्वस्त किया
धीरज दिलीप
- 17 Nov 2025, 03:32 PM
- Updated: 03:32 PM
पारादीप(ओडिशा), 17 नवंबर (भाषा) ओडिशा के जगतसिंहपुर जिला प्रशासन ने सोमवार को सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने उस मकान को ध्वस्त कर दिया, जिसमें कुछ संदिग्ध बांग्लादेशी रह रहे थे। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
प्रशासन ने यह कार्रवाई जिले के जगतसिंहपुर सदर पुलिस थाने के अंतर्गत बेहरामपुर बस्ती में स्थित घर में रह रहे लोगों द्वारा कथित तौर पर किए गए हमले में एक महिला कांस्टेबल सहित दो पुलिसकर्मियों के घायल होने के एक दिन बाद की।
ध्वस्तीकरण के दौरान मौके पर मौजूद वरिष्ठ मजिस्ट्रेट ने बताया, ‘‘यह घर अतिक्रमित सरकारी जमीन पर बना है और संदेह है कि इसका इस्तेमाल बांग्लादेशियों को शरण देने के लिए किया जा रहा था। रविवार को पुलिस पर हमला करने के बाद घर में रहने वाले लोग भाग गए।’’
जगतसिंहपुर के जिला कलेक्टर जे. सोनल ने भी ध्वस्तीकरण अभियान का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
सोनल ने कहा, ‘‘उन क्षेत्रीय अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने सरकारी भूमि पर मकान के निर्माण की अनुमति दी और ऐसे अवैध ढांचे को बिजली कनेक्शन प्रदान किया।’’
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन पश्चिम बंगाल सरकार के संपर्क में है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि जो लोग पड़ोसी राज्य का निवासी होने का दावा कर रहे हैं, वे वास्तव में वहां के हैं या बांग्लादेशी हैं।
जगतसिंहपुर के पुलिस अधीक्षक अंकित कुमार वर्मा ने बताया कि रविवार को उक्त मकान पर छापेमारी के दौरान दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप में उन्हें अदालत में पेश किया है।
वर्मा ने बताया कि पुलिस ने मकान से एक पिस्तौल, कुछ तलवारें और अन्य घातक हथियार बरामद किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने मकान में रह रहे लोगों को पकड़ने के लिए एक टीम गठित की है। छापेमारी के दौरान वे मौके से फरार हो गए थे।’’
पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि लगभग तीस संदिग्ध बांग्लादेशी उसी गांव के सीकू खान नामक व्यक्ति के घर में रह रहे थे। इनमें से 18 लोग पहले ही दूसरी जगह चले गए थे, जबकि कुछ लोग वहीं रह रहे थे। समूह के सरगना की पहचान सिकंदर आलम के रूप में हुई है।
भाषा धीरज