न्यायालय ने राज्यों को दिव्यांग कैदियों के लिए शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया
सुभाष खारी
- 06 Dec 2025, 10:25 PM
- Updated: 10:25 PM
नयी दिल्ली, छह दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे दिव्यांग कैदियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया एक मजबूत, स्वतंत्र और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करें।
न्यायालय ने कहा कि यह तंत्र शिकायतों का शीघ्र पंजीकरण, प्रभावी निगरानी और समय पर समाधान सुनिश्चित करेगा ताकि कैदियों को ‘‘संस्थागत उपेक्षा, दुर्व्यवहार और भेदभावपूर्ण’’ से बचाया जा सके।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि दिव्यांग कैदियों को जेल प्रणाली के भीतर समावेशी शिक्षा तक सार्थक पहुंच प्रदान करने के लिए उपयुक्त सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
पीठ ने दो दिसंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘किसी भी कैदी को केवल दिव्यांगता के कारण शैक्षिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अवसर से वंचित नहीं किया जाएगा और उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त समायोजन किए जाएंगे।’’
न्यायालय ने यह आदेश उस याचिका पर पारित किया, जिसमें विचाराधीन या दोषी के रूप में जेलों में बंद दिव्यांग व्यक्तियों को उचित कानूनी ढांचा और सुविधाएं प्रदान करने के लिए विस्तृत निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
शीर्ष अदालत ने न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए विस्तृत निर्देशों का उल्लेख किया, जिसमें न्यायालय ने इस मुद्दे पर गौर किया था कि क्या तमिलनाडु की जेलों में बंद दिव्यांग कैदियों को उचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
न्यायालय ने इसके बाद कई निर्देश पारित किए थे, जिनमें यह भी शामिल था कि जेल परिसरों में व्हीलचेयर-अनुकूल स्थान, सुलभ शौचालय, रैंप और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
पीठ ने कहा कि सभी जेल अधिकारी दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 89 से उत्पन्न दायित्वों के बारे में सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, कानूनी सहायताकर्मियों और अन्य हितधारकों में जागरुकता फैलाने के लिए पर्याप्त कदम उठाएंगे।
शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार महीने के भीतर एक व्यापक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें उसके द्वारा जारी निर्देशों को लागू करने के लिए किए गए उपायों का उल्लेख हो।
मामले की अगली सुनवाई के लिए सात अप्रैल की तारीख निर्धारित की गई है।
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