न्यायालय ने वरुणा से सिद्दरमैया के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर उनसे जवाब मांगा
देवेंद्र नरेश
- 08 Dec 2025, 06:20 PM
- Updated: 06:20 PM
नयी दिल्ली, आठ दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया से 2023 के चुनावों में वरुणा विधानसभा क्षेत्र से उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा।
इस निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ता ने कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र में ‘‘पांच गारंटियों’’ का उल्लेख किया और आरोप लगाया कि सिद्दरमैया जनप्रतिनिधित्व (आरपी) अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत ‘‘भ्रष्ट आचरण’’ में लिप्त थे।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने के. शंकर नाम के व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सिद्दरमैया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी करें।’’
शंकर ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल के उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें वरुणा विधानसभा क्षेत्र से सिद्दरमैया के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
सोमवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा, ‘‘घोषणापत्र जारी करना भ्रष्ट आचरण कैसे हो सकता है?’’
वकील ने कहा कि शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ इसी तरह के मुद्दे को उठाने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई है।
उन्होंने उच्चतम न्यायालय के 2013 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था, ‘‘हालांकि कानून स्पष्ट है कि चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत ‘भ्रष्ट आचरण’ नहीं माना जा सकता, लेकिन इस वास्तविकता से इनकार नहीं किया जा सकता कि किसी भी प्रकार की मुफ्त चीजों का वितरण निस्संदेह सभी लोगों को प्रभावित करता है।’’
उस फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादों को भ्रष्ट आचरण घोषित करने के लिए धारा 123 के अंतर्गत नहीं पढ़ा जा सकता।
अधिनियम की धारा 123 भ्रष्ट आचरण से संबंधित है।
पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताते हुए इस पर नोटिस जारी किया।
सिद्दरमैया ने उच्च न्यायालय को बताया था कि याचिकाकर्ता भ्रष्ट आचरण के आरोपों को सिद्ध करने के लिए ठोस तथ्य या उदाहरण प्रस्तुत करने में विफल रहा है।
उन्होंने कहा था कि घोषणापत्र में किये गये वादे भ्रष्ट आचरण नहीं माने जायेंगे।
भाषा
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