एनजीटी ने यमुना में मछली की स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण की सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया
सुरेश
- 01 Feb 2026, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिल्ली सरकार और अन्य राज्यों को यमुना नदी में पाई जाने वाली मछलियों की स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण के लिए केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान केंद्र की सिफारिशों को शीघ्रता से लागू करने का निर्देश दिया है।
अधिकरण ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को यमुना नदी के किनारे स्थित शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में मलजल शोधन संयंत्र लगाने और संचालन में तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपचारित जल, जलीय जीव के लिए उपयुक्त मानक को पूरा करे।
पर्यावरण निकाय उस मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने एक समाचार पत्र में छपी खबर का स्वतः संज्ञान लिया था। खबर में प्रयागराज में आईसीएआर-सीआईएफआरआई (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान केंद्र) द्वारा यमुना नदी में मछली की प्रजातियों के संबंध में किए गए एक सर्वेक्षण का हवाला दिया गया था और बताया गया था कि भारत की मछली प्रजातियों की संख्या में कमी आई है।
सर्वेक्षण के अनुसार, कतला, रोहू, नयन, पैडिन (पब्दा), गोच, चीतल, रेंगन (टेंगरा), रीठा, बाम या ईल व महाशीर जैसी भारतीय प्रजातियों की मछलियों की संख्या में कमी आई है, जबकि आठ प्रकार की विदेशी प्रजातियों की मछलियों, जैसे- कॉमन कार्प, सिल्वर कार्प, बिग हेड, थाई मांगुर, ग्रास कार्प, तिलापिया, क्रोकोडाइल फिश और बास की संख्या में वृद्धि हुई है और इसने भारतीय प्रजातियों की मछलियों को प्रभावित किया है।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने 29 जनवरी को अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि भारतीय प्रजातियों की मछलियों की संख्या में गिरावट नदी में प्रदूषण के कारण हुई है।
पीठ ने कहा, ''ऐसा पाया गया है कि हालांकि विभिन्न एजेंसियों ने यमुना नदी में पाई जाने वाली मछली की स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन इन कार्यक्रमों के बावजूद स्थानीय प्रजाति की मछलियों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। इसलिए, यह आवश्यक है कि इन कार्यक्रमों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि इन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।"
अधिकरण ने स्थानीय सरकारों द्वारा अनुपालन के लिए आईसीएआर-सीआईएफआरआई, प्रयागराज की सिफारिशों पर ध्यान दिया।
इनमें अवैध मछली पकड़ने के उपकरणों पर प्रतिबंध, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान बेहतर निगरानी, नियंत्रण और पर्यवेक्षण, रणनीतिक मछली पालन प्रथाओं को लागू करना, निर्दिष्ट क्षेत्रों में श्वास लेने के लिए वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करने वाली मछलियों का पालन-पोषण करना और मछली पकड़ने के आंकड़ों का उचित रिकॉर्ड बनाए रखना शामिल था।
इन सिफारिशों में पट्टे पर दिए गए क्षेत्रों में मछली पालन के लिए दिशानिर्देशों का पालन करना, अनुष्ठानों के लिए विदेशी मछलियों को छोड़ने पर प्रतिबंध लगाना, जन जागरूकता बढ़ाना, पानी का निरंतर प्रवाह बनाए रखना और जैव विविधता की रक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए औद्योगिक और जैविक अपशिष्टों के स्रोत प्रबंधन के लिए कार्रवाई करना भी शामिल था।
अधिकरण ने दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों को सुझावों पर विधिवत विचार करने और उन्हें शीघ्रता से लागू करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया।
भाषा
शुभम सुरेश
सुरेश
0102 2114 दिल्ली