राज्यसभा : भाजपा ने विपक्ष से राष्ट्रीय हितों पर एकसमान रुख अपनाने को कहा
अविनाश
- 02 Feb 2026, 07:07 PM
- Updated: 07:07 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को भाजपा सदस्य सदानंदन मास्टर ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध न करें और उनसे राष्ट्रीय हितों पर एक समान रुख अपनाने का आग्रह किया।
सदानंदन ने उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए यह बात कही। उन्होंने सत्ता पक्ष की तरफ से धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।
सदानंदन ने आसन की अनुमति से अपनी सीट पर बैठकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने अपने सामने वाली मेज पर अपने कृत्रिम पैर रखे हुए थे।
उन्होंने कहा, "लोकतंत्र का नारा लगाने वालों ने 31 साल पहले केरल में मुझ पर हमला किया था। मैं घर लौट रहा था जब संगठित अपराधियों ने मुझे पीछे से पकड़ा, सड़क पर गिरा दिया और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए मेरे पैर काट दिए।"
भाजपा सदस्य जब अपनी यह बात कह रहे थे तो मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य जॉन ब्रिटास ने सदन में कृत्रिम अंग को प्रदर्शित किए जाने का विरोध करते हुए आसन के समक्ष व्यवस्था का प्रश्न उठाया।
इस पर सदानंदन ने ब्रिटास से कहा कि वह असहिष्णुता न दिखाये। भाजपा सदस्य ने कहा, "मैं राष्ट्र और जनता के सामने लोकतंत्र का सार प्रस्तुत करना चाहता हूँ। आप हमेशा लोकतंत्र, सहिष्णुता और मानवता की बात करते हैं। आपकी प्रतिबद्धता राजनीतिक हिंसा पर आधारित है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।"
उन्होंने सदन में उनके जैसे दिव्यांग व्यक्ति को मनोनीत करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
ब्रिटास द्वारा व्यवस्था का प्रश्न उठाये के बाद सदानंदन ने अपने कृत्रिम अंग को अपने सामने वाली मेज से हटा लिया।
भाजपा सदस्य ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य किसी एक सरकार या एक पीढ़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत यात्रा है।
उन्होंने कहा, "मैं विपक्ष से अपील करता हूँ—हम केवल विरोध के लिए विरोध न करें। राष्ट्रीय हित में सभी सदस्य एक समान रुख अपनाएँ। हम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एकजुट हो रहे हैं।"
सांसद ने देशभक्ति की भावना जगाने के लिए राष्ट्रगान 'वंदे मातरम', आरएसएस का गीत "नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि" और एक प्रसिद्ध मलयालम देशभक्ति गीत का हवाला दिया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के इस कथन को भी उद्धृत किया: "भारत माता की पूजा का अर्थ है भारतीयों की सेवा करना।"
उन्होंने कहा, "आज हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वास्तव में हमें मानव सेवा के पवित्र मार्ग पर अग्रसर कर रहे हैं। इसीलिए सभी को एक समान मानते हुए हम जनता की सेवा करने के लिए उत्साह से भरे हुए हैं।"
सदानंदन ने सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। उन्होंने कहा, "यदि भारत वैश्विक मंच पर इतना गौरवशाली स्थान रखता है, तो यह केवल हमारे प्रधानमंत्री की साधना और अटूट संकल्प के कारण ही संभव है। हम वादों की अस्थिरता से निकलकर उन्हें पूरा करने की दृढ़ता की ओर अग्रसर हुए हैं।"
सांसद ने कहा कि भारत की प्रगति चार मुख्य बिंदुओं के कारण हुई है: पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त निजी और व्यावसायिक प्रक्रियाएं; जमीनी स्तर तक उन्नत प्रौद्योगिकी की उपलब्धता; देश के भीतर सख्त अनुशासन; और आंतरिक और बाह्य रूप से सुरक्षा की भावना।
सदानंदन द्वारा पेश धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए भाजपा की विश्राम मेधा कुलकर्णी ने कहा कि विकसित भारत बनाने के लिए ''हमें अथक परिश्रम करना है और आर्थिक समीक्षा बताती है कि हमारी अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है। ''
मेघा ने कहा, कि उथल-पुथल के इस दौर में भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था बताती है कि विकसित भारत का सपना जल्द साकार होगा।
उन्होंने कहा '' बीते वर्षों में तीन करोड़ करदाता बढ़े हैं। इसका मतलब है कि युवाओं को रोजगार मिल रहा है, लोगों की आर्थिक क्षमता बढ़ी, वह क्रय कर रहे हैं और कर भी दे रहे हैं।''
उन्होंने कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोगों का गरीबी रेखा से ऊपर आना बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि चार करोड़ से अधिक आवास बनाए गए, 80 करोड़ लोगों को अनाज दिया गया, 56 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला, 20 लाख से अधिक लोग स्टार्टअप में काम कर रहे हैं। ''यह उपलब्धियां बताती हैं कि मेहनत भी की और मेहनत सफल भी हुई।''
उन्होंने कहा कि 12 करोड़ से अधिक लाभार्थी मुद्रा योजना के हैं जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है। ''महिला सशक्तिकरण का इससे बेहतर उदाहरण और क्या होगा।''
मेधा ने कहा ''आज देश में 55 करोड़ से अधिक जन धन खाते हैं। इन्हें आधार से जोड़ा गया और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के चलते पैसा सीधे खातों में गया। कोई हेराफेरी नहीं हुई। पहले की सरकारों ने ऐसा क्यों नहीं किया? उन्हें काम करने से किसने रोका था? ''
उन्होंने कहा ''कभी देश के पांच जलमार्ग थे जो आज 100 जलमार्ग हो गए हैं। जल पर्यटन बढ़ने से अर्थव्यवस्था ही मजबूत होगी। पर्यटन, चिकित्सा, शिक्षा, कारोबार हर क्षेत्र में ठोस नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की वजह से हम आगे बढ़ रहे हैं। यह रास्ता विकसित भारत की ओर ही जाता है।''
मेधा ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे अच्छी डिजिटल लेन-देन प्रौद्योगिकी है। उन्होंने ''कई देश भारत से उसकी भुगतान प्रणाली की तकनीकी जानकारी और मदद ले रहे हैं और उसके अनुसार भुगतान कर रहे हैं।''
भाषा
माधव अविनाश
अविनाश
0202 1907 संसद