वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में समस्या के बावजूद सरकार ने उपभोक्ताओं को झटके से बचायाः पुरी
रमण
- 01 May 2026, 05:23 PM
- Updated: 05:23 PM
सूरत, एक मई (भाषा) पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा होने के बावजूद भारत ने घरेलू आपूर्ति को स्थिर बनाए रखा और उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के झटके से बचाया।
पुरी ने दक्षिण गुजरात के लिए आयोजित 'वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन' को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण 60 दिनों से जारी आपूर्ति बाधाओं के बावजूद भारत मजबूती से खड़ा है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने वैश्विक झटकों को सीधे उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय राजकोषीय स्तर पर समायोजित किया।
पुरी ने कहा कि संकट शुरू होने के बाद से पिछले 60 दिनों के दौरान कच्चे तेल, एलएनजी, एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन की आपूर्ति की दैनिक आधार पर निगरानी की जा रही है, जिससे देशभर में निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी है।
उन्होंने कहा, "वैश्विक आपूर्ति शृंखला के प्रमुख मार्गों और उत्पादों में 20-30 प्रतिशत तक व्यवधान आने पर कोई भी देश अछूता नहीं रह सकता। ढुलाई और बीमा लागत बढ़ती है, आपूर्ति में देरी होती है और देशों को कठिन फैसले लेने पड़ते हैं।"
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि के बावजूद भारत ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान देश में खुदरा स्तर पर कीमतों में शून्य वृद्धि हुई, जबकि कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखा गया।
पुरी के मुताबिक, 28 फरवरी से 23 अप्रैल के बीच कई देशों में ईंधन कीमतें 40 प्रतिशत तक बढ़ीं, जबकि अमेरिका में डीजल कीमतों में 58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ब्रिटेन में डीजल 26 प्रतिशत एवं पेट्रोल 11 प्रतिशत महंगा हुआ, जबकि जर्मनी एवं पश्चिमी यूरोपीय देशों में कीमतें करीब 19.8 प्रतिशत बढ़ीं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने दीर्घकालिक योजना और समय पर हस्तक्षेप के जरिए घरेलू बाजार को स्थिर रखा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने का निर्णय किसी चुनावी कारण से प्रेरित नहीं है।
उन्होंने कहा, "पिछले चार वर्षों में कई चुनाव हुए हैं, लेकिन सरकार का ध्यान उपभोक्ताओं, विशेषकर 33 करोड़ घरों तक पाइप के जरिये गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।"
पुरी ने बताया कि पिछले दशक में भारत ने कच्चे तेल के स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक विविधीकृत किया है। एलपीजी आयात में अमेरिका, नॉर्वे एवं अल्जीरिया को शामिल किया गया है जिससे पारंपरिक आपूर्ति मार्गों पर निर्भरता घटी है।
उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी उत्पादन 36,000 टन प्रतिदिन से 60 प्रतिशत बढ़ाकर 54,000 टन किया गया है। साथ ही औद्योगिक उपभोक्ताओं को एलपीजी से पाइप वाली प्राकृतिक गैस की ओर स्थानांतरित कर घरेलू खपत को सुरक्षित रखा गया।
पुरी ने कहा कि 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' के तहत तेल कंपनियों, मंत्रालयों, राज्य सरकारों और वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के बीच समन्वित प्रयास किए गए। तेल कंपनियों ने लागत से कम कीमत पर बिक्री कर नुकसान उठाया, जबकि उत्पाद शुल्क में कटौती और निर्यात शुल्क जैसे उपायों से घरेलू बाजार को स्थिर बनाए रखा गया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रखी गई है।
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत अपनी 60 प्रतिशत एलपीजी और लगभग 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस का घरेलू स्तर पर उत्पादन करता है। साथ ही देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है।
उन्होंने गुजरात के संदर्भ में कहा कि राज्य में चार रिफाइनरियां हैं, जिनकी कुल क्षमता 10.19 करोड़ टन प्रति वर्ष है। ये देश की करीब 40 प्रतिशत रिफाइनिंग क्षमता का प्रतिनिधित्व करती हैं। गुजरात में 3.27 करोड़ टन क्षमता वाले चार एलएनजी टर्मिनल और 4,800 किलोमीटर लंबा गैस पाइपलाइन नेटवर्क भी मौजूद है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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