भाजपा आरक्षण व्यवस्था को कमजोर कर रही है : अखिलेश यादव
धीरज
- 20 May 2026, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
(तस्वीर के साथ)
लखनऊ, 20 मई (भाषा) समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को भाजपा सरकार पर संवैधानिक आरक्षण प्रणाली को कमजोर करने का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोगों को संविधान के तहत गारंटीकृत अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
यादव ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए,'आरक्षण की लूट' से संबंधित 'पीडीए ऑडिट' नामक एक दस्तावेज जारी किया और कहा कि रिपोर्ट को अधिक डेटा और तथ्यों के साथ अद्यतन किया जाता रहेगा।
उन्होंने कहा, ''पीडीए ऑडिट और आरक्षण की लूट पर इस दस्तावेज में सुधार जारी रहेगा और इसमें अधिक डेटा शामिल किया जाएगा।''
यादव ने जून 2023 में 'पीडीए' शब्द गढ़ा था जिसका उनके अनुसार अभिप्राय है ''पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक''।
सपा प्रमुख ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर छात्रों और अभ्यर्थियों को संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो "यह समझा जाना चाहिए कि सरकार पक्षपाती है।"
उन्होंने आरोप लगाया, ''अगर हमें संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो इसका अभिप्राय है कि सरकार पक्षपाती है। और जो पक्षपाती है वह बेवफा भी है। पूर्वाग्रह अपने आप में अन्याय है क्योंकि यह अधिकार छीन लेता है।''
सपा अध्यक्ष ने आरक्षण को सामाजिक न्याय और समानता का जरिया बताया। उन्होंने कहा, ''आरक्षण सुरक्षा है। आरक्षण सामाजिक समन्वय का एक उपकरण और माध्यम भी है।''
भाजपा सरकार की बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, ''अगर भाजपा सरकार बुलडोजर चलाना चाहती है, तो उन्हें असमानता की असमान जमीन को समतल करने और सभी को उनका उचित आरक्षण प्रदान करने के लिए उपयोग करना चाहिए।''
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 'पार्श्व प्रवेश' (लेटरल एंट्री) नियुक्तियों जैसे तंत्रों के माध्यम से आरक्षण को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया, ''पार्श्व प्रवेश के जरिए अपनी पसंद के लोगों को पिछले दरवाजे से समायोजित किया जा रहा है ताकि आरक्षण की मांग धीरे-धीरे कमजोर हो जाए।''
'लेटरल एंट्री' से तात्पर्य सरकार के बाहर से व्यक्तियों को सीधे मध्य-स्तर और वरिष्ठ स्तर के पदों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया से है।
यादव ने भाजपा पर संवैधानिक आरक्षण को लेकर ''बेईमानी'' में शामिल होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल समाज के वंचित वर्गों के लिए समान अवसर नहीं चाहता है।
सपा प्रमुख ने कहा, ''आरक्षण दान नहीं है, यह एक अधिकार है।''
उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आरक्षण आवश्यक है।
उक्त 'ऑडिट रिपोर्ट' को ''पीडीए ऑडिट भाग-1'' शीर्षक से एक पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पीडीए श्रेणियों के लिए 11,500 से अधिक आरक्षित पद उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं में प्रभावित हुए हैं।
पुस्तिका में 69,000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग ने आरक्षण मानदंडों के कार्यान्वयन में अनियमितताओं को स्वीकार किया था और इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकार को प्रभावित उम्मीदवारों को राहत देने का निर्देश दिया था।
ऑडिट के अनुसार राज्य सरकार ने 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले स्वीकार किया था कि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया था, लेकिन अब तक कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
पुस्तिका में बांदा कृषि विश्वविद्यालय में 2022 में की गई भर्ती का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि 15 विज्ञापित पदों में से सात ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे, लेकिन इन श्रेणियों के केवल दो उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप पांच आरक्षित पदों का ''नुकसान'' हुआ।
पुस्तिका में 2023 प्रवर्तन कांस्टेबल भर्ती पर भी सवाल उठाए गए हैं और दावा किया गया है कि आरक्षण मानदंडों के तहत 239 पद ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवारों को दिए जाने चाहिए थे, लेकिन केवल 205 ऐसे उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिससे 34 आरक्षित पद रिक्त रह गए।
भाषा चंदन जफर धीरज
धीरज
2005 1639 लखनऊ