भारत ने संरा सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के 'नरसंहार के कृत्यों के कलंकित इतिहास' की निंदा की
वैभव
- 21 May 2026, 12:02 PM
- Updated: 12:02 PM
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 21 मई (भाषा) भारत ने पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा सीमा पार हिंसा के कारण अफगान नागरिकों की मौत और घायल होने की घटनाओं पर प्रकाश डाला और कहा कि उस देश की ओर से आक्रामकता के ऐसे "जघन्य कृत्यों" पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए जो अपने ही लोगों पर बमबारी करता है और सुनियोजित तरीके से नरसंहार करता है।
बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने कड़ा जवाब देते हुए पाकिस्तान के नरसंहार के कृत्यों के "लंबे समय से कलंकित इतिहास" की आलोचना की। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में इस्लामाबाद के राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने मई के लिए परिषद की चीन की अध्यक्षता के दौरान आयोजित एक परिचर्चा में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने 'सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा' विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वार्षिक खुली बहस में कहा, "यह विडंबना है कि नरसंहार के कृत्यों के अपने लंबे समय से कलंकित इतिहास वाले पाकिस्तान ने उन मुद्दों का हवाला देना चुना है जो पूरी तरह से भारत के आंतरिक मामले हैं।"
उन्होंने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) के अनुमानों का हवाला दिया, जिसमें पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा सीमा पार सशस्त्र हिंसा के कारण 2026 के पहले तीन महीनों में अफगानिस्तान में 750 नागरिकों की मौत और घायल होने के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश हवाई हमलों के परिणामस्वरूप हुए हैं।
यूएनएएमए के अनुसार, नागरिकों के हताहत होने से जुड़ी 95 घटनाओं में से 94 के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल जिम्मेदार रहे।
पर्वतनेनी ने कहा कि दुनिया यह नहीं भूली है कि मार्च में रमजान के पाक महीने में पाकिस्तान ने काबुल के ओमिड एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर बर्बरतापूर्ण हमला किया था।
उन्होंने कहा कि यूएनएएमए के अनुसार, "हिंसा के इस कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य में उस स्थान पर 269 नागरिकों की जान चली गई और 122 अन्य घायल हो गए, जिसे किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य के रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता।"
पर्वतनेनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के उच्च सिद्धांतों का समर्थन करते हुए "अंधेरे में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना" पाकिस्तान का "पाखंड" है।
यूएनएएमए के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा हवाई हमले तरावीह की नमाज़ समाप्त होने के बाद हुए, जब कई मरीज़ मस्जिद से बाहर निकल रहे थे।
उन्होंने यूएनएएमए के आंकड़ों का हवाला दिया जिसके मुताबिक, अफ़गान नागरिकों के खिलाफ सीमा पार से हुई सशस्त्र हिंसा के कारण 94,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस की उस अपील को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें उन्होंने सदस्य देशों से अफगानिस्तान के संदर्भ में नागरिकों की सुरक्षा से संबंधित अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को बनाए रखने का आग्रह किया था।
भारत ने सीमा पार आतंकवाद से उत्पन्न लगातार खतरे पर भी चिंता व्यक्त की, जिसके बारे में उसने कहा कि यह क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करता रहता है।
पर्वतनेनी ने पाकिस्तान का स्पष्ट रूप से जिक्र करते हुए कहा, "भारत दशकों से इस प्रकार के आतंकवाद का शिकार रहा है। आतंकवाद को प्रायोजित करने, शरण देने या समर्थन देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि भारत ने लगातार इस बात पर बल दिया है कि आतंकवाद अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में दुनियाभर के नागरिकों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बना हुआ है।
राजदूत ने कहा, "कोई भी कारण या शिकायत नागरिकों पर जानबूझकर किए गए हमलों को उचित नहीं ठहरा सकती।"
पर्वतनेनी ने कहा कि जैसा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट में बताया गया है, शहरों और आबादी वाले इलाकों में मिसाइलों, बमों और अन्य विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों को होने वाले नुकसान का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
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