अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के बाद अब 'सह-निर्माण' की ओर बढ़ रहे भारत-अमेरिका : सर्जियो गोर
भाषा
- 07 Sep 2026, 03:48 PM
- Updated: 03:48 PM
बेंगलुरु, सात सितंबर (भाषा) भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को कहा कि अमेरिका और भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में केवल सहयोग करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब ''सह-निर्माण'' की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और दोनों देश उपकरण तैयार करने, स्टार्टअप को वित्त पोषण देने तथा मानव खोज के भविष्य को आकार देने का मिलकर काम कर रहे हैं।
गोर ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) और न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के साथ मिलकर आयोजित 'बेंगलुरु स्पेस एक्सपो' (बीएसएक्स) के नौवें संस्करण के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।
यह आयोजन सात से नौ सितंबर तक बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी केंद्र (बीआईईसी) में हो रहा है।
अमेरिका-भारत असैन्य अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह की बेंगलुरु में हाल में हुई बैठक का उल्लेख करते हुए गोर ने कहा कि इन चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि दोनों देशों की साझेदारी अब केवल सहयोग तक सीमित नहीं है बल्कि ''सह-निर्माण'' की ओर बढ़ चुकी है।
उन्होंने कहा, ''अब हम केवल आंकड़े साझा नहीं कर रहे बल्कि मिलकर उपकरण तैयार कर रहे हैं, स्टार्टअप को वित्तीय पोषण दे रहे हैं और मानव खोज के भविष्य को संयुक्त रूप से आकार दे रहे हैं।''
गोर ने भारत-अमेरिका अंतरिक्ष साझेदारी पर कहा कि अमेरिका के पास विश्वस्तरीय निजी पूंजी और विकसित वाणिज्यिक तंत्र है जबकि भारत के पास उत्कृष्ट इंजीनियरिंग क्षमता, असाधारण वैज्ञानिक प्रतिभा और निर्भीक स्टार्टअप क्षेत्र है।
उन्होंने कहा, ''इन दोनों की साझेदारी एक ऐसी नयी बेहतरीन टीम तैयार करती है जो अद्भुत काम कर सकती है और करेगी।''
गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तालमेल को पहचाना तथा इसी के तहत 'ट्रस्ट' ('ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी' यानी रणनीतिक प्रौद्योगिकी के उपयोग से संबंधों में बदलाव) पहल शुरू की गई।
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि बेंगलुरु में 'यूएस कमर्शियल सर्विस' का विस्तार किया जा रहा है ताकि अमेरिकी उद्योग और भारतीय नवोन्मेषकों के बीच सीधा वाणिज्यिक संपर्क स्थापित किया जा सके।
उन्होंने कहा, ''आप कोई भी क्षेत्र चुन लें, अमेरिका और भारत उसमें साथ मिलकर काम कर रहे हैं और वे ऐसे स्तर पर काम कर रहे हैं जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। चाहे द्विपक्षीय व्यापार हो, जो आज 240 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है या फिर दवा, प्रौद्योगिकी, सैन्य सहयोग या कोई अन्य क्षेत्र- हम कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं।''
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ('नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन') और इसरो के संयुक्त पृथ्वी अवलोकन उपग्रह 'निसार' का उल्लेख करते हुए गोर ने कहा कि यह मिशन महज वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है बल्कि यह जीवन बचाने वाला एक महत्वपूर्ण साधन भी है।
उन्होंने कहा, ''दो महीने पहले वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप आया था, तब निसार के रडार आंकड़ों ने घने बादलों और धूल के बावजूद आपातकालीन राहत दलों को प्रभावित क्षेत्र तक सीधे पहुंचने में मदद की। यह इस बात का उदाहरण है कि जब हम साथ मिलकर काम करते हैं तो कितने महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं।''
गोर ने कहा कि पिछले वर्ष ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाना भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था और यह अमेरिकी साझेदारी के जरिए संभव हुआ।
उन्होंने कहा, ''एक्सिओम-4 मिशन और पांच संयुक्त वैज्ञानिक अध्ययनों के बाद अब हम डॉकिंग मानकों, आपसी अनुकूलता और अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण पर काम कर रहे हैं। 'ट्रस्ट' क्षमता पैदा करता है और क्षमता महत्वाकांक्षा को जन्म देती है।''
गोर ने कहा कि भारत 'आर्टेमिस समझौते' का हस्ताक्षरकर्ता है और नासा ने इसरो को चंद्र आधार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया है।
उन्होंने कहा, ''इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम चंद्रमा पर वापस जा रहे हैं और हम चाहते हैं कि चंद्रमा की सतह पर भारत हमारे साथ हो।''
गोर ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के किए गए सुधारों ने वाणिज्यिक गतिविधियों में नयी तेजी पैदा की है और पृथ्वी अवलोकन, अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता एवं प्रक्षेपण प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप उभर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''चंद्रमा हमारा लक्ष्य हो सकता है लेकिन इस यात्रा को गति देने वाली ताकत जमीनी स्तर पर हो रहा नवोन्मेष है जो हमारी प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और वाणिज्यिक बाजारों में हो रहा है।''
अमेरिकी राजदूत ने भारतीय अंतरिक्ष उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिकी बाजार उनके लिए खुला है।
गोर ने कहा कि दोनों देश वैश्विक अंतरिक्ष प्रशासन के क्षेत्र में भी मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''वाशिंगटन और दिल्ली अधिनायकवादी वर्चस्व के खिलाफ खुले और नियम-आधारित अंतरिक्ष प्रशासन की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।''
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