गुमिन मिजे प्रकरण: खांडू ने जताई चिंता, एनएचआरसी में भी पहुंची शिकायत
नरेश
- 26 May 2026, 08:23 PM
- Updated: 08:23 PM
ईटानगर, 26 मई (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को मादक पदार्थों के खिलाफ मुहिम चलाने वाले कार्यकर्ता गुमिन मिजे को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर दी गई यातना पर चिंता व्यक्त की। पुलिस हिरासत में उनके शरीर पर चोट के निशान दिखाने वाली तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद राज्य और पड़ोसी राज्य असम में आक्रोश तेज हो गया है।
राज्य सरकार ने इस मामले को असम के समक्ष उठाया है।
खांडू ने कहा कि सोशल मीडिया पर घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया।
खांडू ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अरुणाचल प्रदेश किसी अन्य राज्य की न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, लेकिन उसने असम सरकार को अपनी चिंताओं से स्पष्ट रूप से अवगत कराया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "मिजे ने पिछले कई वर्षों से यहां मादक पदार्थों के खिलाफ उत्कृष्ट कार्य किया है। उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल कई व्यक्तियों की गिरफ्तारी में भी मदद की है।"
मुख्यमंत्री ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि उन्होंने असम सरकार से विशेष रूप से अनुरोध किया है कि हिरासत में रहने के दौरान मिजे के साथ किसी भी प्रकार की यातना या दुर्व्यवहार न हो।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है।
अरुणाचल एंटी-ड्रग वॉरियर्स (एपीएडीडब्ल्यू) के अध्यक्ष मिजे को असम के लखीमपुर जिले के बिहपुरिया पुलिस थाने में दर्ज एक मामले के संबंध में 20 मई को असम पुलिस ने ईटानगर से गिरफ्तार किया था।
मिजे पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पोपी काकाती द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, यह मामला 15 मई को असम के सेस्सा राजगढ़ में हुई एक कथित हिंसक घटना से संबंधित है, जहां 12 से 15 अज्ञात व्यक्तियों के एक समूह ने एक घर में घुसकर परिवार के सदस्यों पर कथित तौर पर हमला किया, हथियार दिखाए और नकदी एवं मोबाइल फोन लूट लिया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि हमलावर तीन वाहनों में उसके पति रूपम काकाती की तलाश में आए थे। जब उसने कथित तौर पर भागने का प्रयास किया, तो उसका पीछा किया गया, उसके साथ मारपीट की गई, उसे हथकड़ी पहनाई गई और उस पर गोली चलाई गई।
प्राथमिकी के अनुसार, बीच-बचाव करने की कोशिश करने पर शिकायतकर्ता पर भी हमला किया गया।
पुलिस ने बताया कि झड़प के दौरान गोलीबारी के आरोपों के बाद मिज को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि, कार्यकर्ता के समर्थकों ने दावा किया कि वह मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान के सिलसिले में उस इलाके में गए थे और कथित तौर पर मादक पदार्थों के संदिग्ध तस्करों द्वारा हमला किए जाने के बाद उन्होंने आत्मरक्षा में चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई थीं।
उनकी गिरफ्तारी के तुरंत बाद, मिज के शरीर पर चोट के निशान और खरोंच दिखाने वाली तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए जिससे पूर्वोत्तर में व्यापक जन आक्रोश फैल गया और छात्र संघों, नागरिक समाज समूहों और मादक पदार्थों के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने न्याय की मांग की।
इस घटना ने अरुणाचल प्रदेश में तीव्र भावनात्मक प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं, जहां मिज मादक पदार्थों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियानों में सहायता करने के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं।
कई संगठनों और नागरिकों ने आरोप लगाया है कि मादक पदार्थों के खिलाफ उनका अभियान संभवत: उन्हें क्षेत्र में मादक पदार्थों के कारोबार से जुड़े स्वार्थी तत्वों के निशाने पर ले आया।
विवाद बढ़ने के बीच असम के लखीमपुर जिले के बिहपुरिया थाने में कार्यकर्ता के साथ हिरासत में प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
नामसाई निवासी बुटेंग तायेंग द्वारा दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों ने हिरासत के दौरान मिजे के साथ मारपीट की, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उचित चिकित्सकीय जांच से वंचित रखा।
याचिका में एनएचआरसी से आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है।
हालांकि, बिहपुरिया थाने के अधिकारियों ने हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें और वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार किए गए हैं।
भाषा
राखी नरेश
नरेश
2605 2023 ईटानगर