अक्षमता की मिसाल हैं प्रधान, राजधर्म का पालन करें और इस्तीफा दें: कांग्रेस
मनीषा
- 01 Jun 2026, 03:12 PM
- Updated: 03:12 PM
नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) कांग्रेस ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर सोमवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर ''अहंकार और अक्षमता की मिसाल बन जाने'' का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें अपना राजधर्म का पालन करते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।
पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि छात्र को अपनी ही उत्तर पुस्तिका की सही जांच के लिए 2000 रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है और ऐसे में सीबीएसई में बैठे ''जेबकतरों'' से सावधान रहने की जरूरत है।
राहुल गांधी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "जेबकतरों से सावधान, आज वे सीबीएसई के अंदर बैठे हैं। सीबीएसई की गलती से नंबर ग़लत आए तो आपको क्या मिलता है?"
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अपनी ही उत्तर पुस्तिका की सही जांच के लिए एक बच्चे को 2000 रुपये तक भरने पड़ सकते हैं।
उनका कहना है, "सोचिए, जब चार लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन डाले हैं तो सीबीएसई कितनी कमाई कर रहा है। जब स्कैनिंग फ़ोन से हुई हो, तो गलत मार्किंग तय है, और उसे ठीक करवाने की क़ीमत बच्चा भर रहा है। गलती सीबीएसई की। सज़ा बच्चे को। कमाई सरकार की।"
राहुल गांधी ने दावा किया, "जब शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया जाए तब गलती सुधारी नहीं जाती, बढ़ाई जाती है। इसकी सबसे बड़ी क़ीमत हमारे बच्चे चुका रहे हैं।''
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "ओएसएम प्रणाली में साइबर सुरक्षा संबंधी खामियों से इनकार करने के बाद अब सीबीएसई ने आखिरकार यह स्वीकार कर लिया है कि सिस्टम से समझौता किया गया था। लेकिन अपने कॉन्ट्रैक्टर कोएम्प्ट के खिलाफ वह क्या कार्रवाई करने जा रहा है?"
उन्होंने दावा किया कि ऐसा प्रतीत होता है कि सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय में कोएम्प्ट से लाभान्वित होने वालों को पहले से अंदाजा था कि कोएम्प्ट इस काम के लिए योग्य साबित नहीं होगी।"
रमेश ने कहा, "देश आखिर कब तक ऐसे मंत्री प्रधान को बर्दाश्त करेगा, जिनके मंत्रालय ने निविदा प्रक्रिया में ऐसी अकल्पनीय अनियमितताओं को न केवल होने दिया, बल्कि उन्हें संरक्षण भी दिया, जिसकी कीमत लाखों छात्रों को अपनी मानसिक शांति खोकर चुकानी पड़ी? मंत्री प्रधान अहंकार और अक्षमता की जीती-जागती मिसाल बन चुके हैं, जो राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी से ऊपर अपने राजनीतिक एजेंडे को रखने पर अड़े हुए हैं।"
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कभी भी खुद को या अपने सहयोगियों को नैतिकता और शुचिता के किसी मानक पर कसने के लिए नहीं जाने गए हैं..., लेकिन मंत्री प्रधान को अपना राजधर्म निभाते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, '' एक नारा दिया गया था कि ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा'। लेकिन मुझे लगता है असली नारा था- 'न पढूंगा, न पढ़ने दूंगा।''
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में मंत्रियों में से किसी ने भी शिक्षा व्यवस्था या सीबीएसई की निंदा में एक शब्द नहीं कहा है।
खेड़ा ने सवाल किया, ''विशेषज्ञ और शिक्षकों ने 36 बिंदुओं में ओएसएम प्रणाली की खामियां बताई थीं, मोदी सरकार ने उसे क्यों नजरअंदाज किया? मोदी सरकार ने निविदा की शर्तें किसके आदेश पर हल्की कर दीं? एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए आपने नियम क्यों बदले? कोएम्प्ट कंपनी और भाजपा के बीच क्या रिश्ता है कि उसे टीसीएस के मुकाबले प्राथमिकता दी गई? मोदी सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था को पीछे क्यों धकेल रही है?''
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हक मनीषा
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