भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता लागू; कपड़ा, रत्न और आभूषण क्षेत्र को मिलेगी शुल्क मुक्त पहुंच
अजय
- 01 Jun 2026, 07:55 PM
- Updated: 07:55 PM
नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता सोमवार से लागू हो गया। इसके तहत वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न और आभूषण समेत भारत के 99 प्रतिशत निर्यात को ओमान के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा और पेशेवरों को आवागमन की बेहतर सुविधा का लाभ होगा।
दूसरी ओर, भारतीय उपभोक्ताओं को ओमान से सस्ते खजूर मिलेंगे क्योंकि समझौते के तहत कोटा-आधारित शुल्क रियायतें लागू होंगी।
ओमान के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) का कार्यान्वयन महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी-ईरान युद्ध के कारण भारतीय निर्यातकों को खाड़ी देशों में माल भेजने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
छह खाड़ी देश ओमान, बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात हैं।
भारत ने अपनी कुल 12,556 'टैरिफ लाइन' में से 77.79 प्रतिशत पर शुल्क रियायतें दी हैं। यह मूल्य के हिसाब से ओमान से भारत के आयात का 94.81 प्रतिशत है।
ओमान के लिए निर्यात के लिहाज से महत्वपूर्ण और भारत के लिए संवेदनशील उत्पादों के लिए, प्रस्ताव मुख्य रूप से शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) आधारित शुल्क उदारीकरण है। इसमें खजूर, मार्बल और पेट्रोरसायन उत्पाद शामिल हैं।
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता मूल्य के हिसाब से भारत के ओमान को होने वाले 99.38 प्रतिशत निर्यात के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है, जिसमें ओमान की 98.08 प्रतिशत 'टैरिफ लाइन' शामिल हैं।
मुक्त व्यापार समझौते पर 18 दिसंबर, 2025 को मस्कट में हस्ताक्षर किए गए थे।
दोनों पक्षों द्वारा आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, समझौता एक जून, 2026 से प्रभावी हो गया।
समझौते के लागू होने के अवसर पर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से कृषि और रत्न एवं आभूषण उत्पादों की लगभग 10 खेप तरजीही दरों के तहत खाड़ी देश को भेजी गईं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा, ''भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से, यह समझौता हमारे निर्यातकों और पेशेवरों के लिए नए अवसर खोलता है। ओमान हमारा भरोसेमंद साझेदार है और खाड़ी देशों तथा पूर्वी अफ्रीका का प्रवेश द्वार है।''
उन्होंने कहा कि श्रम-प्रधान क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाकर, यह समझौता रोजगार सृजन में सहयोग देगा, निवेश को बढ़ावा देगा और भारतीय उद्यमों को उन देशों के आपूर्तिकर्ताओं के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगा जिन्हें तरजीही बाजार पहुंच प्राप्त है।
भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 11.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 10.61 अरब डॉलर था।
मंत्री ने कहा कि इस समझौते से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), विनिर्माण और रोजगार को उल्लेखनीय गति मिलने की उम्मीद है। इससे रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और औषधि जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी। श्रम-प्रधान वस्तुओं पर पहले ओमान में पांच प्रतिशत आयात शुल्क लगता था। ओमान में आयात शुल्क पांच से 100 प्रतिशत के बीच है।
सोहार, दुक्म और सलालाह में स्थित ओमान के रणनीतिक लॉजिस्टिक केंद्र भारतीय निर्यातकों को जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) और पूर्वी अफ्रीकी बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करते हैं।
सभी शून्य शुल्क रियायतें तत्काल प्रभाव से लागू हो रही हैं। जिससे भारतीय निर्यातकों को निश्चितता और प्रतिस्पर्धी क्षमता प्राप्त होगी।
भाषा रमण अजय
अजय
0106 1955 दिल्ली