मानव-वन्यजीव संघर्ष संरक्षण एवं विकास की राह में बहुत बड़ी चुनौती : केंद्रीय पर्यावरण मंत्री
अविनाश
- 10 Jul 2026, 06:39 PM
- Updated: 06:39 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कहा कि इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव भारत के सामने संरक्षण से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
मंत्री ने कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) के उद्घाटन के दौरान ये बातें कहीं।
उद्घाटन के बाद 'इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव' पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। देश भर से वरिष्ठ नीति-निर्माता, वन प्रबंधक, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और संरक्षण से जुड़े लोग इंसानों एवं वन्यजीवों के बीच टकराव को कम करने पर चर्चा के लिए पहुंचे हैं।
यादव ने कहा, ''इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव भारत में संरक्षण और विकास से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इंसानी गतिविधियों के बढ़ने, जमीन के इस्तेमाल के तरीकों में बदलाव और वन्यजीवों के पर्यावास घटने की वजह से इंसानों और जंगली जानवरों का आमना-सामना बढ़ गया है। हमारा नज़रिया समाधान खोजने वाला होना चाहिए... जिसमें आधुनिक प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया जाए।''
मंत्री ने भरोसा जताया कि यह नया उत्कृष्टता केंद्र बाघों, तेंदुओं और हाथियों के साथ इंसानों के टकराव की घटनाओं को रोकने के लिए एक रणनीति बनाएगा।
उन्होंने कहा कि इंसानों और जंगली जानवरों के आमना-सामना होने की स्थिति से निपटने के लिए शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा, ''इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव से निपटने के लिए इलाके एवं जानवरों की प्रजातियों के हिसाब से खास उपाय करने की ज़रूरत है। इससे समाज में फैली घबराहट को दूर करने में काफी मदद मिलेगी। ''
यादव ने देश भर के वन विभागों से यह भी अपील की कि वे पर्यावरण और वन्यजीवों पर इंसानी गतिविधियों, निर्माण कार्यों और फसलों के असर को कम करने के लिए पहले से ही बचाव के उपाय करें।
इस कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि वन्यजीवों के प्रभावी संरक्षण के कारण इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा, ''यह न केवल संरक्षण से जुड़ा मामला है, बल्कि एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक समस्या भी बन गया है, जो लंबे समय में लोगों की आजीविका को प्रभावित कर रहा है। देश में वन्यजीव संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन बनाते हुए दीर्घकालिक समाधान खोजने की ज़रूरत है।''
भाषा राजकुमार अविनाश
अविनाश
1007 1839 दिल्ली