अखिलेश, मुलायम पर निशाना साधने वाले पोस्टरों से सियासी बवाल; सपा ने भाजपा पर लगाया आरोप
अविनाश
- 14 Jul 2026, 03:08 PM
- Updated: 03:08 PM
लखनऊ, 14 जुलाई (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधने वाले विवादास्पद पोस्टर मंगलवार को लखनऊ, मथुरा, सीतापुर और बाराबंकी सहित उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर दिखाई दिए, जिसके बाद सपा ने भाजपा और सहयोगियों पर सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया।
पोस्टरों में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को मुस्लिम समुदाय से जुड़ी टोपी पहने हुए दिखाया गया है और नारा लिखा गया है, "दिल में बाबर, मुंह में राम"। पोस्टर लगाने वालों की पहचान का पता नहीं चल सका है।
यह घटनाक्रम अयोध्या में राम मंदिर दान निधि के कथित गबन को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच आया है। विपक्ष ने हाल के हफ्तों में बार-बार यह मुद्दा उठाया है।
सीतापुर में सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टरों को हटा दिया।
सपा सांसद आनंद भदौरिया ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एक होर्डिंग हटा दी और इस घटना को "कायरतापूर्ण कृत्य" करार दिया।
भदौरिया ने कहा, "यह दूसरी बार है जब इस तरह के होर्डिंग सामने आए हैं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि इसके पीछे भाजपा है। जहां भी ऐसे पोस्टर पाए जाएं, उन्हें फाड़ दिया जाना चाहिए और जला दिया जाना चाहिए।"
मथुरा में सपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि ''असामाजिक तत्वों'' ने आपत्तिजनक होर्डिंग लगाकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है।
यादव ने आरोप लगाया, "भाजपा इतनी बौखला गई है कि उसके पास हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। राम मंदिर दान मामले में वे पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं।"
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता से शांति बनाए रखने की अपील की और मांग की कि जिला प्रशासन सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से जिम्मेदार लोगों की पहचान करे और कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू करे।
वरिष्ठ सपा नेता प्रदीप चौधरी ने कहा कि पार्टी प्राथमिकी दर्ज कराएगी। उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ''हम सीसीटीवी फुटेज की जांच करेंगे और इस शरारत में शामिल लोगों की पहचान करेंगे। यह शांति और सद्भाव को बिगाड़ने की साजिश है।''
एक अन्य वरिष्ठ सपा नेता अशोक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पोस्टर राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं से ध्यान भटकाने का एक प्रयास था।
उन्होंने कहा, "अखिलेश यादव गहरे धार्मिक व्यक्ति हैं। मतदाता अब जागरूक हैं और उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता।"
कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर ने भी जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि ऐसे मुद्दे इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि राम मंदिर दान विवाद में भाजपा और आरएसएस "बेनकाब" हो गए हैं।
बाराबंकी में, शहर के एक प्रमुख चौराहे पर लगे ऐसे ही पोस्टरों को सपा कार्यकर्ताओं ने फाड़ दिया।
सपा नेता ताज बाबा राईन ने इस घटना को पार्टी की छवि खराब करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश बताया।
कोतवाली थाना प्रभारी सुधीर सिंह ने कहा कि होर्डिंग जब्त करने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, "सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने पोस्टरों का बचाव किया।
राजभर ने पीटीआई वीडियो से कहा, "पोस्टर उचित हैं। यदि आप बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद संसदीय कार्यवाही को देखें, तो राम गोपाल यादव, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने बार-बार कहा कि उन्होंने कार सेवकों पर गोलीबारी का आदेश देने की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर हिंदू उन्हें वोट नहीं देंगे, तो भी वे मुसलमानों की सुरक्षा के लिए खड़े होंगे। ये पोस्टर उन बयानों का जवाब हैं।"
हालांकि, सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने भाजपा पर जनता की चिंताओं से ध्यान भटकाने के लिए बाबरी मस्जिद मुद्दे को पुनर्जीवित करने का आरोप लगाया।
वर्मा ने पीटीआई वीडियो से कहा, "भाजपा और उसके सहयोगी समाज का ध्रुवीकरण करने और बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, पेपर लीक और पेट्रोल एवं डीजल की बढ़ती कीमतों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए बार-बार बाबरी मस्जिद मुद्दे को उठाते हैं। अगर लोग इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर देंगे, तो भाजपा राजनीतिक रूप से ढह जाएगी। 1992 के मुद्दों की आज कोई प्रासंगिकता नहीं है।"
संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वे सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं और पोस्टर लगाने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान होने पर कानूनी कार्रवाई करेंगे।
इससे पहले 12 जुलाई को, अयोध्या राम मंदिर में दान के कथित गबन को लेकर गोरखपुर जिले में सपा द्वारा लगाए गए एक विवादास्पद पोस्टर के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था, जिसके कारण पार्टी के एक नेता सहित तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
पुलिस ने शास्त्री चौक पर लगे बैनर के मामले में स्थानीय सपा नेता अरविंद उपेन्द्र शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
भाषा सं जफर नरेश अविनाश
अविनाश
अविनाश
1407 1508 लखनऊ