ताहिर हुसैन की दोषसिद्धी के बाद कांग्रेस और केजरीवाल को माफी मांगनी चाहिए : भाजपा
मनीषा
- 14 Jul 2026, 04:36 PM
- Updated: 04:36 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) भाजपा ने राष्ट्रीय राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में साल 2020 के सांप्रदायिक दंगे के दौरान हुई खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिये जाने के एक दिन बाद मंगलवार को विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा और उनसे माफी की मांग की।
केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्य विपक्षी कांग्रेस को भी आड़े हाथ लेते हुए 2020 के दिल्ली दंगों के लिए उसके नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। पार्टी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी से 'बिना शर्त माफी' की मांग करते हुए आरोप लगाया कि अंकित शर्मा के परिवार का साथ देने के बजाय, उन्होंने ''लाश पर राजनीति'' की और 'तुष्टीकरण' की नीति अपनाई।
दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को अंकित शर्मा हत्या मामले में हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी करार दिया। घटना के समय हुसैन आप का पार्षद था और मामले में नाम आने के बाद पार्टी ने उसे निलंबित कर दिया था।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ''यह संविधान, कानून, न्याय और जनता की जीत'' है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से यह सुनिश्चित हुआ है कि भारत में कानून का राज चलेगा और आरोपी को कानून का सामना करना ही होगा, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली या अच्छी जान-पहचान वाले क्यों न हों।
भाटिया ने कहा कि इस फैसले से पीड़ित परिवार और समाज को सुकून मिला है, जिसकी उन्हें जरूरत थी।
यहां भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में भाटिया ने आरोप लगाया, ''इसके लिए सबसे बड़े दोषी अरविंद केजरीवाल हैं, जिनके कहने पर यह सब हुआ। मामले को दबाने की कोशिशें की गईं और ताहिर हुसैन को राजनीतिक संरक्षण दिया गया। गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल छिप गए और उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा।''
उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल के साथ हुसैन के 'संबंध' आज भी बने हुए हैं और आप संयोजक उसे अब भी 'राजनीतिक संरक्षण' दे रहे हैं।
भाटिया ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए आरोप लगाया, ''सोनिया गांधी भी उतनी ही दोषी हैं, जितने राहुल गांधी। संसद से सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) पारित होने के बाद, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने यह दावा करके भ्रम का माहौल बनाया कि इसके लागू होने से मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी।''
उन्होंने आरोप लगाया, ''जब दंगों की साजिश रची जा रही थी, तब सोनिया गांधी ने कहा था 'यह आर पार की लड़ाई है'। जब कोई वरिष्ठ नेता धार्मिक दृष्टिकोण से ऐसा भड़काऊ बयान देता है और उसके बाद दंगे भड़कते हैं, तो सोनिया गांधी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।''
भाटिया ने मांग की कि केजरीवाल हुसैन का साथ देने के लिए देश और दिल्ली की जनता से माफी मांगें।
उन्होंने कहा, ''सोनिया गांधी और राहुल गांधी को भी अपने पहले दिए गए बयान वापस लेने चाहिए और बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। साथ ही धार्मिक आधार पर लोगों को भड़काने की कोशिश करने वाले अमानतुल्लाह खान (आप नेता) और इमरान मसूद (कांग्रेस सांसद) जैसे नेताओं को तत्काल अपनी पार्टियों से निकाल देना चाहिए।''
इस बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के कथित बयान को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। सत्तारूढ़ भाजपा ने मंगलवार को एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा किया जिसमें मसूद को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ''अगर उनका नाम ताहिर हुसैन के बजाय कपिल होता, तो उन्हें बरी कर दिया जाता।''
भाजपा के एक अन्य राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अदालत के फैसले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है और एक बार फिर वोट-बैंक की राजनीति कर रही है।
उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, '' कांग्रेस हमेशा देश से ऊपर वोट-बैंक की राजनीति को रखती है और यह एक बार फिर स्पष्ट हो गया है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा है कि ताहिर हुसैन को इसलिए दोषी नहीं ठहराया गया कि वह दोषी हैं, बल्कि इसलिए कि उनका नाम ताहिर है। उनके अनुसार, अगर उसका नाम कपिल होता, तो उसे बरी कर दिया जाता। वह एक फैसले को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं।''
पूनावाला ने आरोप लगाया कि फैसले से यह साबित हो गया है कि 2020 के दिल्ली दंगे ''स्वाभाविक नहीं, बल्कि सुनियोजित और प्रायोजित'' थे।
उन्होंने आरोप लगाया, '' फैसले से यह साबित हुआ है कि दिल्ली दंगे असल में दंगे नहीं, बल्कि हिंदुओं के खिलाफ एक सुनियोजित नरसंहार था। इससे साबित होता है कि कैसे आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या आम आदमी पार्टी के तत्कालीन पार्षद ने की थी और यह कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और प्रायोजित घटना थी। यह साजिश थी। लेकिन हिंदू पीड़ितों का साथ देने के बजाय, कांग्रेस पार्टी वोट-बैंक की राजनीति के नाम पर ताहिर हुसैन का साथ दे रही है।''
भाजपा के एक और राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने आरोप लगाया कि मसूद की टिप्पणियां हताश कांग्रेस की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश प्रतीत होती है।
उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''यह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी की हताशा को दिखाता है। उत्तर प्रदेश के हर चुनाव से पहले, कांग्रेस अल्पसंख्यक और मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए तमाम प्रयास करती है।''
सिन्हा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनावों से पहले भी इसी तरह की कोशिश की थी।
उन्होंने आरोप लगाया, ''2012 के विधानसभा चुनावों से पहले, सलमान खुर्शीद ने एक जनसभा में दावा किया था कि बाटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों के शव देखकर सोनिया गांधी रो पड़ी थीं। अब कांग्रेस पार्टी ने ताहिर हुसैन के प्रति भी नरमी दिखाई है, जिन्हें अरविंद केजरीवाल का समर्थन हासिल था।''
सिन्हा ने सवाल किया कि क्या मसूद का बयान कांग्रेस का आधिकारिक रुख है? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पार्टी का रुख स्पष्ट करना चाहिए।
भाषा धीरज राखी मनीषा
मनीषा
1407 1636 दिल्ली