चन्नी के समर्थक कांग्रेस नेताओं ने 'सारा पंजाब चन्नी नाल' संदेश वाली तस्वीर साझा की
वैभव
- 15 Jul 2026, 08:30 PM
- Updated: 08:30 PM
चंडीगढ़, 15 जुलाई (भाषा) पंजाब कांग्रेस में गहराते अंतर्कलह के बीच पार्टी के कई नेताओं ने बुधवार को जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के साथ एक तस्वीर साझा की, जिस पर 'सारा पंजाब चन्नी नाल' (सारा पंजाब चन्नी के साथ) लिखा था।
यह सोशल मीडिया पोस्ट ऐसे समय में सामने आई, जब पंजाब मामलों के कांग्रेस प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल ने दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल से मुलाकात की।
बघेल ने पंजाब दौरे के बाद राज्य इकाई में गुटबाजी को लेकर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी नेतृत्व को सौंपी।
पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बरकरार रखने के पार्टी नेतृत्व के फैसले से कथित तौर पर नाराज हैं।
ब्रिंदर ढिल्लों, स्मित सिंह और ईशरप्रीत सिंह सिद्धू उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने चन्नी (पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री) के साथ तस्वीर साझा की। सभी नेताओं ने यह तस्वीर अपने-अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट की।
ब्रिंदर और स्मित ने 2022 के विधानसभा चुनाव में क्रमशः रूपनगर और अमरगढ़ विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। ईशरप्रीत पंजाब में 'नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया' (एनएसयूआई) के अध्यक्ष हैं।
चन्नी ने बुधवार को यहां विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा से भी उनके आवास पर मुलाकात की। बाजवा हाल ही में वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद दिल्ली से लौटे हैं।
एक जुलाई को जब कांग्रेस ने वडिंग को पंजाब इकाई का अध्यक्ष बनाए रखने और चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला किया, तब से ही पार्टी की पंजाब इकाई में आपसी कलह मची हुई है।
चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के नेतृत्व वाले नेताओं के एक धड़े ने इस फैसले का विरोध करते हुए वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने और चन्नी को राज्य में पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की मांग की थी।
आपसी मतभेदों के कारण पार्टी नेतृत्व को बघेल को वडिंग और चन्नी का समर्थन करने वाले पार्टी नेताओं से मिलने के लिए भेजना पड़ा और उन्होंने इसके लिए पंजाब का छह दिन का दौरा किया।
दोनों नेताओं के बीच कोई समझौता नहीं हो सका।
दौरे के दौरान बघेल ने कहा था कि पार्टी का फैसला बदला नहीं जा सकता और उसे वापस लेना नेतृत्व के लिए कोई छोटा मामला नहीं है।
पंजाब में अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
भाषा
शुभम वैभव
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