कॉजपा ने शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया, सरकार की बातचीत की पेशकश को ठुकराया
रंजन
- 23 Jul 2026, 10:32 PM
- Updated: 10:32 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने बृहस्पतिवार को 24 जुलाई को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने का देशव्यापी आह्वान किया और लोगों से हर जिले में प्रदर्शन करने की अपील की। कॉजपा ने बातचीत के लिए सरकार के प्रस्ताव को ठुकराते हुए जोर दिया कि कोई भी बातचीत सिर्फ किसी निष्पक्ष जगह पर ही होनी चाहिए।
कॉजपा ने यह भी कहा गया कि पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा में जवाबदेही के मुद्दे या नीट पेपर लीक पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग का समाधान नहीं हुआ।
सरकार ने आज बातचीत की एक और अपील की। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि मुद्दों को सुलझाने के लिए बैठक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के सरकारी आवास या उनके कार्यालय में हो सकती है।
नड्डा ने भी कॉजपा को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन संगठन के नेताओं ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अपनी इस मांग पर अड़े रहे कि वे केवल किसी निष्पक्ष जगह पर ही बैठक करेंगे।
शुक्रवार को विरोध-प्रदर्शन के आह्वान पर कॉजपा ने कहा कि देश भर में 'हर जिला, एक दिन, एक मांग' के नारे के तहत सभाएं की जाएंगी। इन सभाओं में शामिल लोग प्रदर्शनकारियों की मांगें पढ़कर सुनाएंगे और 20 जुलाई को दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई में घायल हुए छात्रों, अभिभावकों और अन्य लोगों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करेंगे।
यह देशव्यापी आह्वान तब आया जब जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन एक नए चरण में प्रवेश कर गया; इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा कड़ी रही, विरोध स्थल के आसपास पाबंदियां जारी रहीं और 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हमले तेज हो गए।
कॉजपा के विरोध-प्रदर्शन जारी रहने के बीच बृहस्पतिवार शाम 14 घंटे से ज़्यादा समय तक बंद रहने के बाद राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार खोल दिए गए, जबकि 13 अन्य स्टेशन बंद ही हैं।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''मंडी हाउस, राजीव चौक और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश द्वार अब खुल गए हैं।''
इससे पहले दिन में डीएमआरसी ने सुरक्षा कारणों से राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, आईटीओ और खान मार्केट समेत 16 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया था।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर के दायरे में मध्यरात्रि तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं।
पाबंदियों के बावजूद, विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर भीड़ बढ़ती गई और लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगाते रहे।
कॉजपा ने यह भी आरोप लगाया कि उसके आंदोलन को बाधित करने की कोशिशें की जा रही थीं। कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि विरोध स्थल पर गड़बड़ी पैदा करने और बाद में प्रदर्शनकारियों पर दोष मढ़ने के लिए ''बाहरी लोगों'' और ''भाजपा के गुंडों'' को भेजा जा रहा है। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
कॉजपा के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें सादे कपड़ों में कुछ युवक लाठियां लिए हुए प्रदर्शनकारियों को धमकाते हुए दिख रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे ही एक व्यक्ति ने जंतर-मंतर पर एक नाबालिग प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला किया था। उन्होंने मांग की कि दिल्ली पुलिस सख्त कानूनी धाराएं लगाए और आरोपी को हिरासत में ले।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ''बाहरी लोग'' और ''आदतन अपराधी'' प्रदर्शनों में शामिल हुए थे और हिंसा में उनकी कोई भूमिका थी।
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने बृहस्पतिवार को कहा कि छात्रों की छवि को नकारात्मक रूप में दिखाया जाना ''बेहद दुखद'' है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हिंसा के आरोपों के बीच उन्होंने सवाल किया कि ''छात्रों की चिंताओं को सुनने के बजाय उनकी नीयत पर सवाल उठाना आसान क्यों है''।
आंग्मो ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में अपील की कि जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी है, उन्हें बिना किसी सबूत के दिल्ली में कहीं और हुई हिंसा की घटनाओं से जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, ''जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और अगर दिल्ली में कहीं और हिंसा की खबरें आती हैं, तो कृपया बिना सबूत के उन्हें इस आंदोलन से नहीं जोड़ें।''
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश के युवाओं का कल्याण और हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी का युवाओं के लिए यह संदेश ऐसे समय आया है, जब तीन दिन पहले कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हजारों छात्रों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'संसद चलो' मार्च निकाला था।
इस मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे बड़ी संख्या में छात्र घायल हो गए। वहीं, विरोध मार्च को रोकने की कोशिश के दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर यह भी कहा कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में शामिल लोगों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए सरकार ने त्वरित अदालतें स्थापित करने का फैसला किया है।
मोदी ने कहा, ''हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। हमारे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर संबंधित प्राधिकारियों और अधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।''
कॉजपा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग को दोहराते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा में जवाबदेही के मुद्दे पर कोई बात नहीं की गई है।
इस बीच, कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन में शामिल दलों के कई नेताओं ने उन सभी छात्रों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने पेपर लीक के कारण अपनी जान दे दी। नेताओं ने कहा कि वे प्रदर्शन कर रहे छात्रों और उनकी मांगों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
इससे पहले, कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन में शामिल कई दलों के नेता लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर इकट्ठा हुए और प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों के लिए अपना पूर्ण समर्थन दोहराया।
राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसद बस में सवार होकर 'गांधी स्मृति' गये। वहां पहुंचकर, गांधी और विपक्ष के सांसदों ने हाथ जोड़कर दिवंगत छात्रों को श्रद्धांजलि दी और बाद में राष्ट्रगान गाया।
गांधी अपने साथ संविधान की एक छोटी प्रति लिये हुए थे, जबकि विपक्षी सांसद महुआ माझी और महुआ मोइत्रा राष्ट्रीय ध्वज पकड़े हुए दिखीं। कुछ सांसदों ने 'गांधी स्मृति' में अपने मोबाइल फोन की लाइट भी जलाई।
भाषा शफीक रंजन
रंजन
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