कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ के स्वास्थ्य प्रभावों से जुड़ी याचिका पर केंद्र, एफएसएसएआई से जवाब तलब
सुरेश
- 29 Jul 2026, 09:24 PM
- Updated: 09:24 PM
नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने चीनी रहित (नॉन-शुगर) और कृत्रिम मिठास देने वाले पदार्थ (आर्टिफिशियल स्वीटनर) से जुड़े दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने 23 जुलाई को इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए) की ओर से दायर याचिका पर केंद्र सरकार और एफएसएसएआई को नोटिस जारी किया और उनसे दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।
आईएसएमए ने कहा कि उसकी याचिका वैज्ञानिक मूल्यांकन और जोखिम आकलन पर आधारित है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जनस्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा संस्थाओं द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। उसने कहा कि इन आकलनों में कुछ कृत्रिम मिठास देने वाले पदार्थों के सेवन से जुड़े लंबे समय के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों की ओर संकेत किया गया है। इनमें संभावित कैंसरकारी प्रभाव (कार्सिनोजेनिसिटी), चयापचय संबंधी विकार, तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव, हृदय संबंधी बीमारियां और आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों में बदलाव जैसी चिंताएं शामिल हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव और अंकुर छिब्बर पेश हुए, जिन्हें एकेएस पार्टनर्स ने निर्देशित किया।
याचिका में एफएसएसएआई को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह गैर-चीनी मिठास देने वाले पदार्थ और कृत्रिम मिठास देने वाले पदार्थों से जुड़े लंबे समय के स्वास्थ्य प्रभावों का भारत-विशिष्ट, व्यापक और स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन कराये। इसमें इनके चयापचय स्वास्थ्य, हृदय रोग, कैंसरकारी प्रभाव, तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य और विभिन्न आयु एवं जनसंख्या समूहों में लंबे समय तक इनके सेवन के तरीकों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन शामिल हो।
याचिका में प्राधिकारियों को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वे कृत्रिम मिठास देने वाले पदार्थों के लंबे समय तक सेवन से जुड़े संभावित स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में उचित जन-सलाह, जागरूकता अभियान और उपभोक्ता मार्गदर्शन जारी करें। इसमें विशेष रूप से बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित लोगों और अन्य संवेदनशील वर्गों को ध्यान में रखने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि नॉन-शुगर स्वीटनर्स (एनएसएस) और कृत्रिम मिठास वाले उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और मार्केटिंग किसी भी तरह से झूठी, भ्रामक या धोखा देने वाली ना हो। इसमें यह सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया गया है कि ऐसे उत्पादों को पर्याप्त और समान रूप से स्पष्ट जानकारी दिए बिना स्वाभाविक रूप से "स्वास्थ्यवर्धक", "सुरक्षित", "डाइट" (कम कैलोरी वाले या वजन नियंत्रित करने में मददगार) या चीनी के लाभकारी विकल्प के रूप में पेश न किया जाए।
इस मामले पर अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
भाषा अमित सुरेश
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