पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की नीति को लेकर किसानों की राय पर विचार करेगी सरकार : चौहान
अजय
- 04 Aug 2026, 07:23 PM
- Updated: 07:23 PM
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि सरकार पेट्रोल में एथनॉल मिलाने (ब्लेंडिंग) की नीति के संदर्भ में किसानों की राय पर विचार करेगी। उन्होंने 'ऑल इंडिया किसान कोऑर्डिनेशन कमेटी' (एआईकेसीसी) के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद यह बात कही। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की थी कि इस योजना का फायदा कंपनियों और बिचौलियों के बजाय किसानों तक पहुंचे।
चौहान ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि सरकार का दृष्टिकोण यह पक्का करना है कि एथनॉल कार्यक्रम से होने वाला फायदा पूरी मूल्य श्रृंखला- ''खेत से लेकर ईंधन टैंक तक''- में बंटे। लेकिन फायदे का सबसे बड़ा हिस्सा किसानों को मिलना चाहिए।
एआईकेसीसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद भूपिंदर सिंह मान ने किया। इसमें बिनोद आनंद, गुरुसाहब सिंह मान और गुणवंत पाटिल समेत कई अन्य लोग शामिल थे।
एक सरकारी बयान के अनुसार, चौहान ने कहा कि एथनॉल से देश की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आर्थिक स्थिति, दोनों मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इस कार्यक्रम के तहत किसी फसल या राज्य के साथ अन्याय न हो।
उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि मक्का, चावल, गन्ना और अन्य फीडस्टॉक (कच्चे माल) की कीमतों और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए नीति की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि फैसले किसानों — खासकर मक्का उगाने वाले कृषकों — के हितों को प्राथमिकता देते हुए लिए जाएंगे।
चौहान ने कहा कि एथनॉल पर वैज्ञानिक अध्ययनों और तकनीकी रिपोर्ट का इस्तेमाल 'नकारात्मक बातों' का जवाब देने के लिए किया जाएगा और इस मुद्दे पर किसानों के साथ तथ्यों पर आधारित बातचीत की जाएगी।
किसानों के प्रतिनिधियों ने एथनॉल कार्यक्रम का समर्थन करते हुए जोर दिया कि इसका असली फायदा किसानों तक पहुंचना चाहिए न कि यह सिर्फ कंपनियों या बिचौलियों तक सीमित रहे।
कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही गलत जानकारी की ओर इशारा किया, जिसमें कहा जाता है कि एथनॉल से गाड़ियों को नुकसान होता है या किसानों को घाटा होता है।
उन्होंने कृषि मंत्रालय और किसान संगठनों से मिलकर काम करने का आग्रह किया ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन फसलों को एथनॉल से फायदा होगा, और ज्यादा पानी वाली फसलों से हटकर सूखे का सामना करने वाली फसलों की ओर कैसे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने विभिन्न मीडिया मंचों के जरिये युवा पीढ़ी के सामने एथनॉल की सही तस्वीर पेश करने की भी बात कही।
किसान नेताओं ने कहा कि वे कृषि उत्पादों को मंडियों से आगे पेट्रोल पंप और ऊर्जा बाजार तक पहुंचाने में मदद करेंगे, जिससे किसानों के लिए एक नया रास्ता खुलेगा।
एआईकेसीसी के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे जमीनी स्तर पर एथनॉल के बारे में गलतफहमियों को दूर करने के लिए काम करेंगे और किसानों के हित में नीति बनाने की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे।
हालांकि बैठक का मुख्य मुद्दा एथनॉल था, लेकिन दोनों पक्षों ने किसानों की आय, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), बाजार और राष्ट्रीय कृषि नीति जैसे अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की।
भाषा राजेश राजेश अजय
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