विजयन ने पेंशन मुहैया कराने की व्यवस्था में बदलाव के लिए केरल सरकार पर साधा निशाना
दिलीप
- 07 Aug 2026, 03:53 PM
- Updated: 03:53 PM
तिरुवनंतपुरम, सात अगस्त (भाषा) केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने सहकारी बैंकों के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन को घर तक पहुंचाने की सेवा बंद करने के यूडीएफ सरकार के फैसले की शुक्रवार को कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राज्य की कल्याणकारी पेंशन योजना को कमजोर करने की दिशा में पहला कदम है।
एक बयान में विजयन ने कहा कि बिस्तर पर पड़े मरीजों को छोड़कर सभी लाभार्थियों के लिए आधार से जुड़े बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) को अनिवार्य करना, लोगों के अनुकूल उस व्यवस्था को खत्म कर देगा, जिसके तहत पिछले 10 वर्षों से करीब आधे पेंशनभोगियों को बैंक जाए बिना उनके घर पर ही पेंशन मिल रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार सहकारी बैंकों के माध्यम से पेंशन मुहैया कराने की व्यवस्था को खत्म करने का प्रयास कर रही है और इस कदम से खास तौर पर गरीबों, बुजुर्गों, दिव्यांगों तथा बैंकिंग सेवा नेटवर्क से बाहर रहने वाले लोगों पर असर पड़ेगा।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता विजयन ने इस आदेश को ''दक्षिणपंथी सोच'' का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि इसमें सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लाभार्थियों के अधिकार के बजाय सरकार की ओर से दी जाने वाली खैरात के रूप में देखा जाता है।
उन्होंने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया कि केंद्रीय वित्तीय सहायता कायम रखने के लिए डीबीटी नियमों का पालन जरूरी था। विजयन ने कहा कि राज्य में हर महीने दी जाने वाली कुल सामाजिक सुरक्षा पेंशन में केंद्र का योगदान सिर्फ एक प्रतिशत के आसपास है और इससे केवल 13.5 प्रतिशत पेंशनभोगियों को ही फायदा मिलता है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार करीब 86 प्रतिशत लाभार्थियों की पेंशन की पूरी राशि का वित्तपोषण करती है। उन्होंने कहा कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने घर पर पेंशन मुहैया कराने की व्यवस्था को जारी रखने के लिए डीबीटी को पूरी तरह लागू करने की केंद्र की मांग का विरोध किया था।
विजयन के विचारों का समर्थन करते हुए माकपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री के एन. बालगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम कल्याणकारी पेंशन व्यवस्था को धीरे-धीरे कमजोर करने और अंततः खत्म करने के प्रयास का हिस्सा है।
बालगोपाल ने कहा कि केरल में केंद्र सरकार से किसी भी तरह की कल्याणकारी पेंशन पाने वाले लाभार्थियों की संख्या केवल करीब 8.40 लाख है और इसकी राशि महज 300 से 500 रुपये के बीच है।
भाषा आशीष दिलीप
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