नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में एनटीए के तीन विषयों के विशेषज्ञ मुख्य आरोपी: सीबीआई का आरोप-पत्र
सुरेश
- 07 Aug 2026, 06:07 PM
- Updated: 06:07 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोप-पत्र में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञों --पी. वी. कुलकर्णी (रसायन विज्ञान), मनीषा गुरुनाथ मांढरे (प्राणी विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान) और मनीषा संजय हवलदार (भौतिकी)-- को मुख्य आरोपी बताया गया है।
सीबीआई ने हाल में उस विशेष त्वरित अदालत के समक्ष आरोप-पत्र दाखिल किया है, जो ''प्रश्नपत्र लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अन्य अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों'' की सुनवाई कर रही है।
आरोप-पत्र में कहा गया है, ''जांच में सामने आया है कि इन तीनों विशेषज्ञों को अनुवाद के दौरान लिखने के काम के लिए गोपनीय कक्ष के अंदर सादे कागज उपलब्ध कराए गए थे।''
आरोप-पत्र के अनुसार, ''आरोपी पी वी कुलकर्णी ने इन कागजों का इस्तेमाल कर छोटी पर्चियों पर रसायन विज्ञान के सभी 135 प्रश्नों और उनके उत्तर विकल्पों को संक्षेप में लिखा और उन्हें छिपाकर बाहर ले गया।''
कुलकर्णी को प्रश्नपत्र लीक का कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।
आरोप-पत्र में कहा गया है कि एनटीए के गोपनीय कक्ष में प्रवेश या बाहर निकलने के दौरान विशेषज्ञों की कोई जांच नहीं हुई या तलाशी नहीं ली गई। इसमें कहा गया कि कुलकर्णी ने आसान प्रश्नों को याद कर लिया था और होटल लौटने के बाद उन्हें लिख लिया।
आरोप-पत्र में कहा गया है, ''वनस्पति विज्ञान के लिए एनटीए की अंग्रेजी से मराठी अनुवादक और प्राणी विज्ञान के लिए अनुवादक मनीषा मांढरे, दिन का काम पूरा करने और होटल के कमरे में लौटने के बाद एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में संबंधित जरूरी पैराग्राफ़ को मार्क करती थीं।''
आरोप-पत्र में कहा गया है, ''एक ही तरह की सामग्री के साथ दशकों के अनुभव के कारण वह आसानी से प्रश्नों को एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक की सामग्री से जोड़ने में सक्षम थीं।''
इसमें कहा गया कि भौतिकी के अनुवाद की जिम्मेदारी संभालने वाली मनीषा संजय हवलदार ''दिन का काम पूरा करने के बाद दिल्ली में अपने ठहरने के स्थान पर लौटकर प्रश्नों को संक्षेप में लिख लिया करती थीं।''
आरोप-पत्र में कहा गया है कि इन विशेषज्ञों की गतिविधियां पकड़ में नहीं आ सकीं, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी स्थित एनटीए कार्यालय में सीसीटीवी के सीधे प्रसारित होने वाले फुटेज की निगरानी के लिए कोई विशेष नियंत्रण कक्ष नहीं था।
प्रश्नपत्र लीक की प्रक्रिया को दर्शाने वाली एक तालिका के अनुसार, ये प्रश्न इन विशेषज्ञों से होते हुए ''बिचौलियों और अन्य लोगों'' तक पहुंचाए गए थे।
इसमें कहा गया है कि प्रश्न तेजस हर्षदकुमार शाह, डॉ. मनोज भगवानराव शिरूरे, शिवराज मोटेगांवकर, धनंजय निवृत्ति लोखंडे और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर तक पहुंचाए गए। इनमें से कुछ लोग कोचिंग संस्थान या परामर्श संस्थान चलाते थे।
कड़ी जोड़ने वाली तालिका के अनुसार, इसमें अंतिम कड़ी में राजस्थान के शुभम मधुकर खैरनार, मंगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल और हरियाणा के यश यादव द्वारा प्रश्नों को अभ्यर्थियों तक ''आगे मुहैया'' कराया गया।
आरोप-पत्र में अभ्यर्थियों के साथ बातचीत और लेन-देन का जिक्र करते हुए कहा गया है कि खैरनार ने पैसे के बदले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के लिए अभ्यर्थियों से संपर्क किया, सुरक्षा के तौर पर उनके शैक्षणिक दस्तावेज और एक खाली चेक लिया तथा लीक हुए प्रश्नपत्र को आगे बांटने में शामिल लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहा।
इसमें कहा गया है, ''मंगीलाल बिवाल के मोबाइल फोन से बरामद ऑडियो फाइल से इस साजिश और इसमें शामिल लोगों की जानकारी होने की बात का भी पता चलता है।''
आरोप-पत्र में कहा गया, ''छब्बीस अप्रैल, 2026 के एक ऑडियो में उसने (मंगीलाल ने) चिंता जताई थी कि अगर विकास बिवाल और ऋषि बिवाल अभ्यर्थियों के अभिभावकों से पैसों के लालच में कोई गलत कदम उठाते हैं तो प्रश्नपत्र लीक का खुलासा हो सकता है।''
आरोप-पत्र में कहा गया है, ''अन्य ऑडियो रिकॉर्डिंग में परीक्षा से चार दिन पहले यश यादव द्वारा पीडीएफ या हार्ड कॉपी के रूप में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने, कीमत को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने पर बातचीत, 150 प्रश्नों की विशेष व्यवस्था और अन्य खरीदारों के लिए 450 प्रश्नों के एक अलग सेट की चर्चा की गई है।''
आरोप-पत्र में कहा गया है कि आरोपी मनीषा संजय वाघमारे ''पैसों के बदले नीट यूजी 2026 के प्रश्नों को लीक करने और प्रसारित करने की साजिश में प्रमुख आरोपियों में से एक थीं'' और उन्होंने ''अभ्यर्थियों तथा विषय विशेषज्ञों के बीच कड़ी के रूप में काम किया''।
आरोप-पत्र में कहा गया है, ''इस व्यवस्था के माध्यम से उन्होंने सह-आरोपियों, कुलकर्णी और मनीषा मांढरे, से लीक हुई सामग्री हासिल की। इसके लिए वह अभ्यर्थियों को विशेष कक्षाओं के लिए उनके पास भेजती थीं और छात्रों एवं उनके अभिभावकों से पैसे भी एकत्र करती थीं। उन्होंने परीक्षा से पहले लीक हुए प्रश्नों को सह-आरोपी धनंजय लोखंडे को भी बेचा।''
केंद्रीय एजेंसी के आरोप-पत्र में सरकारी दस्तावेज जांच विशेषज्ञ (जीईक्यूडी) से मिले पुष्टि संबंधी साक्ष्यों का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि जब्त किए गए कई प्रश्नपत्रों के सेट पर लिखावट विषय विशेषज्ञों की लिखावट से मेल खाती है। जीईक्यूडी विशेष केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला है।
आरोप-पत्र के अनुसार, जीईक्यूडी के विश्लेषण में मनीषा हवलदार और तेजस शाह के डिजिटल उपकरणों से बरामद भौतिकी के 68 प्रश्नों की जांच की गई। इसमें पुष्टि हुई है कि ये प्रश्न आरोपियों की बताई गई लिखावट में ही लिखे गए थे।
भाषा आशीष सुरेश
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