सीबीआई ने नीट प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में खामियों का किया उजागर
सुरेश
- 07 Aug 2026, 08:47 PM
- Updated: 08:47 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मेडिकल की प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 में सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर, लेकिन सामान्य प्रक्रियागत खामियों को उजागर किया है। इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के ''गोपनीय कक्ष'' में तलाशी और जांच की व्यवस्था का अभाव, वहां उचित सीसीटीवी निगरानी नहीं होना और प्रश्नपत्र तैयार करने के अलग-अलग चरण में एक ही लोगों की भागीदारी शामिल है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सीबीआई ने यहां एक विशेष अदालत में दाखिल 94 पन्नों के आरोप-पत्र में कहा कि एजेंसी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली में अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियों के विभाजन की कमी को गंभीरता से चिह्नित किया है। इसके कारण एक व्यक्ति को मेडिकल की प्रवेश परीक्षा राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) के अंतिम प्रश्नपत्र तक पहुंच मिल गई।
एनटीए की प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में चार महत्वपूर्ण चरण शामिल थे— प्रश्न तैयार करना, समीक्षा, जांच-पड़ताल और अनुवाद।
पहले चरण यानी प्रश्न तैयार करने के दौरान विशेषज्ञों को प्रश्न और उनके उत्तर उपलब्ध कराने के लिए बुलाया जाता है। उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि उनके दिए गए प्रश्न अंतिम प्रश्नपत्र में शामिल होंगे या नहीं।
इसके बाद समीक्षा का चरण आता है, जिसमें कुछ विशेषज्ञों को एनटीए के लिए तैयार किए जाने वाले चार सेट के प्रश्नों का चयन करने के लिए बुलाया जाता है। इन चारों सेट का कठिनाई स्तर एक समान रखा जाना होता है। इस प्रक्रिया में विशेषज्ञों को प्रत्येक सेट के लिए 45 प्रश्नों को अंतिम रूप देना होता है, यानी कुल 180 प्रश्नों का चयन किया जाता है।
इसके बाद जांच-पड़ताल का चरण आता है, जिसमें विषय विशेषज्ञों द्वारा अंतिम रूप दिए गए प्रश्न सेटों को हल किया जाता है। इसके बाद यह जांच की जाती है कि सुझाए गए उत्तर आपस में मेल खाते हैं या नहीं। किसी तरह का विवाद होने पर एनटीए के निदेशक संबंधित विशेषज्ञों के साथ बैठकर मामले का समाधान करते हैं।
अंतिम रूप दिए गए प्रश्न सेट का विषय विशेषज्ञों द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जाता है। इसके बाद अनुवाद की शुद्धता जांचने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि अनुवाद में किसी भी संदर्भ संबंधी त्रुटियां न हों, विषय विशेषज्ञ ही इन अनुवादित प्रश्नों का दोबारा अंग्रेजी में अनुवाद करते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि आदर्श रूप से उपरोक्त सभी चरण को अलग-अलग विशेषज्ञों द्वारा पूरा किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक व्यक्ति को पूरी परीक्षा की जानकारी हासिल न हो सके।
सीबीआई ने आरोप लगाया, ''हालांकि, नीट-यूजी 2026 परीक्षा के लिए वास्तव में अपनाई गई प्रक्रिया में पाया गया कि कई विशेषज्ञों को एक से अधिक चरण में शामिल किया गया। इसके अलावा, समीक्षा चरण के बाद से संबंधित विशेषज्ञों को अंतिम प्रश्न सेट तक पूरी पहुंच प्राप्त थी।''
सीबीआई ने आरोप लगाया, ''यह स्थिति विशेष रूप से अनुवाद/पुन: अनुवाद के चरण में देखने को मिली, क्योंकि इस चरण में एक ही विशेषज्ञ अंतिम चारों मास्टर प्रश्नपत्र सेट को देख सकता था।''
अपनी जांच में सीबीआई ने ओखला स्थित एनएसआईसी भवन की पहली मंजिल के पूरे एक हिस्से में संचालित होने वाले एनटीए के 'गोपनीय कक्ष' की बेहद कमजोर सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख किया है। इसी कक्ष में स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि एनटीए में ''गोपनीय कक्ष'' में प्रवेश करने या वहां से बाहर निकलने वाले विशेषज्ञों की जांच या तलाशी लेने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस तरह की बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था के अभाव का फायदा उठाकर रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी ने 135 प्रश्नों को ''छोटी-छोटी कागज की पर्चियों'' पर लिख लिया और वहां तीन दिन तक काम करने के दौरान उन्हें ''बिना किसी की नजर में आए'' अपने होटल के कमरे तक ले गए।
एनटीए के पैनल में शामिल तीन आरोपी व्याख्याताओं -रसायन विज्ञान के लिए पी. वी. कुलकर्णी, प्राणी विज्ञान और वनस्पति विज्ञान के लिए मनीषा गुरुनाथ मांढरे तथा भौतिकी के लिए मनीषा संजय हवलदार- ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में मौजूद खामियों का फायदा उठाया। आरोप है कि उन्होंने अंतिम प्रश्नपत्र को पूरी सटीकता के साथ दोबारा तैयार कर लिया और इसे मोटी रकम के बदले छात्रों के एक करीबी समूह के साथ साझा किया।
भाषा आशीष सुरेश
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