‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने से पहले राहुल गांधी युवाओं से माफी मांगें: मोहन यादव
भाषा
- 05 Sep 2026, 05:52 PM
- Updated: 05:52 PM
इंदौर, पांच सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि इस आयोजन से पहले उन्हें कांग्रेस की पिछली सरकारों द्वारा युवाओं से किए गए कथित अन्याय के लिए माफी मांगनी चाहिए।
यादव ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ''अगर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मध्यप्रदेश आ रहे हैं, तो उनका स्वागत है। लेकिन कांग्रेस की पिछली सरकारों ने राज्य के युवाओं के साथ जो अन्याय किया, वह पहले उसके लिए उनसे क्षमा-याचना करें।''
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में वर्ष 1956 से लेकर 2003 तक कांग्रेस के राज में युवाओं के साथ-साथ किसानों, महिलाओं और अन्य वर्गों की बुरी हालत थी।
यादव ने कहा कि कांग्रेस के पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान सूबे में काफी बेरोजगारी थी और प्रति व्यक्ति आय केवल 11,700 रुपये थी।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासनकाल में प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1.67 लाख रुपये हो गई है।
कांग्रेस ने इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए पहले 12 सितंबर की तारीख तय की थी। बाद में विपक्षी दल ने यह कहते हुए इस कार्यक्रम को 19 सितंबर को आयोजित करने का फैसला किया कि उसे राज्य सरकार ने शहर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में इस आयोजन की अनुमति नहीं दी। अब यह कार्यक्रम दूसरे स्थल पर होगा।
इस बीच, कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंदौर में प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में 'साम-दाम-दंड-भेद' का इस्तेमाल करते हुए रोड़े अटका रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के इन कथित हथकंडों का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि विद्यार्थियों और युवाओं की भावनाएं सत्तारूढ़ दल की रीति-नीति के खिलाफ हैं।
नायक ने यह भी कहा कि 2027 में जनगणना के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए अधिसूचित जाति सूचियों का उपयोग किया जाएगा, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सामान्य वर्ग के लिए खुली (ओपन एंडेड) जाति प्रविष्टियों का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस तरीके से जनगणना किए जाने पर ओबीसी और सामान्य वर्ग की एक ही जाति कई नामों, वर्तनियों और उप जातियों के तहत दर्ज हो जाएगी जिससे आंकड़ों में भारी गड़बड़ हो सकती है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने मांग की कि भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और सामान्य वर्ग की जातियां दर्ज करने के लिए राज्यवार सत्यापित 'ड्रॉपडाउन' जाति सूची (सॉफ्टवेयर में पहले से मौजूद पूर्व-निर्धारित जातियों के विकल्पों की सूची जिनमें से सीधे जाति चुनी जा सकती है) का उपयोग किया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया,''केंद्र सरकार जान-बूझकर सही तरीके से जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहती।''
भाषा