नेहा बोरा रिहा, दीपके को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा: दिल्ली पुलिस
भाषा
- 17 Oct 2026, 02:05 PM
- Updated: 02:05 PM
नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की अदालत में पेश किया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने यह जानकारी दी।
कनॉट प्लेस में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले दोनों को एहतियातन हिरासत में लिया गया था।
पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत हिरासत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बोरा को रिहा कर दिया गया, जबकि दीपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग करने के एक नए मामले में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दीपके को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें एसईएम की अदालत में पेश किया जाएगा। अदालत यह तय करेगी कि उन्हें जेल भेजा जाएगा या जमानत पर रिहा किया जाएगा।
इससे पहले, दस अक्टूबर को जब दीपके को हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था, तब भी शांति भंग करने का एक अलग मामला दर्ज किया गया था। उस समय उनसे एक साल तक शांति बनाए रखने के मुचलके पर हस्ताक्षर कराए गए थे।
रिहा होने के बाद नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए हिरासत में लेने की कार्रवाई को ''गैर-कानूनी'' करार दिया।
बोरा ने 'पीटीआई वीडियो' से कहा, ''मुझे मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया और सुबह पांच बजे तक (थाने में) रखा गया। आप (पुलिस) गैर-कानूनी तरह से हिरासत में क्यों ले रहे हैं? देश में यह काफी समय से हो रहा है और इस आंदोलन ने साफ कर दिया है कि ऐसी गिरफ्तारियां की जा रही हैं। इसने ऐसी घटनाओं को उजागर किया है। पुलिस कानून-व्यवस्था का पालन करने और नियमों के मुताबिक काम करने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है।''
आइसा अध्यक्ष ने दीपके समेत हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की मांग की।
उन्होंने कहा, ''इस आंदोलन के दौरान पुलिस शाम को गैर-कानूनी तरीके से लोगों को हिरासत में लेती है और अगली सुबह या शाम को छोड़ती है। हमें समझ नहीं आता कि कौन सा कानून इस तरह की हिरासत की इजाजत देता है। अभिजीत दीपके सहित हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाना चाहिए। मध्य दिल्ली में कर्फ्यू जैसे माहौल को खत्म किया जाना चाहिए।''
बोरा ने कहा, ''ज्ञानेश कुमार और भाजपा सरकार को अपना अड़ियल रवैया छोड़ना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को या तो इस्तीफा देना चाहिए या फिर महाभियोग चलाकर उन्हें जेल भेजा जाए। साथ ही एसआईआर प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगनी चाहिए ताकि दिल्ली और देश की जनता राहत की सांस ले सके।''
बोरा की रिहाई के बाद, आइसा ने दावा किया कि यह घटनाक्रम उनकी हिरासत को लेकर देशभर में 12 घंटे तक चले विरोध और आक्रोश के बाद हुआ है। संगठन ने इस मुश्किल समय में साथ खड़े रहने के लिए मीडिया और लोगों का धन्यवाद किया।
संगठन ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया रद्द कराने के लिए उसकी लड़ाई जारी रहेगी।
आइसा ने दीपके की रिहाई की मांग करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''अभिजीत दीपके को अब भी अवैध हिरासत में क्यों रखा गया है? तिरंगा मार्च में शामिल होने की इच्छा रखने वाले एक आम नागरिक को घंटों से बंधक बनाकर उसकी आजादी छीनी गई है। अब उन्हें दोपहर 12 बजे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है।''
कॉजपा की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी दीपके की गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए उनकी रिहाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि दीपके को उनके घर के बाहर से उठाया गया था, उस समय इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें कहां रखा गया है और उनके वकील को भी नहीं मिलने दिया गया।
सिंह ने कहा, ''मजिस्ट्रेट अदालत को अभिजीत दीपके को रिहा कर देना चाहिए, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी गैरकानूनी है। उन्होंने केवल लोगों से तिरंगा फहराने का आग्रह किया था। यह अपने आप में अपराध कैसे हो सकता है?''
उन्होंने कहा, ''दिल्ली पुलिस एहतियातन हिरासत की आड़ में गैरकानूनी काम नहीं कर सकती।''
पुलिस सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को कनॉट प्लेस जाने के दौरान बोरा को मंडी हाउस से और दीपके को झंडेवालान से हिरासत में लिया गया था।
आइसा ने दावा किया कि हिरासत में लिए जाने के बाद बोरा को आर.के. पुरम थाने ले जाए जाने से पहले पांच घंटे तक दिल्ली में एक जगह से दूसरी जगह घुमाया गया।
संगठन ने आरोप लगाया कि वकील आधी रात के आसपास आर.के. पुरम थाने पहुंचे, लेकिन उन्हें बोरा से मिलने नहीं दिया गया।
आइसा ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें कब रिहा किया जाएगा और यह जानते हुए भी कि वह पिछले कुछ दिन से अस्वस्थ हैं, उन्हें दवाएं देने से मना किया।
पुलिस के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुचारू यातायात के लिए लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया।
कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में सुरक्षाकर्मियों की घेराबंदी है और पार्क के भीतर द्रुत कार्य बल (आरएएफ) के जवान तैनात हैं साथ ही इलाके में अतिरिक्त बल को भी तैनात किया गया है।
भाषा