मौजूदा स्थिति में बांग्लादेश से हिंदुओं के बड़े पैमाने पर पलायन के आसार नहीं: अभिजीत बनर्जी
सुभाष अविनाश
- 09 Dec 2024, 08:08 PM
- Updated: 08:08 PM
(सौगत मुखोपाध्याय)
कोलकाता, नौ दिसंबर (भाषा) नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि बांग्लादेश में मौजूदा और उभरती स्थिति में वहां से अल्पसंख्यक हिंदुओं के भारत पलायन करने के आसार नहीं है।
उन्होंने कहा कि पलायन मुख्य रूप से ‘सोशल नेटवर्क’ और आर्थिक अवसर के कारण होता है ना कि उत्पीड़न के चलते और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों द्वारा सामना किए जा रहे उत्पीड़न की स्थिति में भी यह सिद्धांत लागू होता है।
एपीजे कोलकाता साहित्य महोत्सव के 16वें सत्र के पूर्वावलोकन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए यहां की हालिया यात्रा के दौरान पीटीआई-भाषा के साथ विशेष बातचीत में बनर्जी ने कहा कि उन्हें लगता है कि समुदाय पर हमलों के बजाय, ‘‘बांग्लादेश से आने वाले हिंदू प्रवासियों के लिए भारत की स्पष्ट राजनीतिक प्राथमिकता’’ ने अतीत में वहां के लोगों को अपनी मातृभूमि छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
महोत्सव में उनकी नयी पुस्तक ‘छौंक: ऑन फूड, इकोनॉमिक्स एंड सोसाइटी’ का विमोचन किया गया।
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘लोग पलायन कर उस देश में जाते हैं जहां उनका परिवार होता है या कहीं अधिक अमीर देश में जाते हैं, जहां आर्थिक अवसर अधिक होते हैं।’’
बनर्जी ने कहा कि उन्हें इस बात को लेकर आश्चर्य नहीं है कि हिंदू बंगालियों ने बांग्लादेश छोड़ा और असम के बड़े हिस्से में बस गए क्योंकि भारत ने मुसलमानों के बजाय हिंदुओं को खुलकर प्राथमिकता दी है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कह रहा कि उत्पीड़न किसी भी परिस्थिति में बड़े पैमाने पर पलायन का कारण नहीं बनेगा। लेकिन यह एक ऐसी धारणा है जिससे मैं सहमत नहीं हूं। दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और समाजशास्त्रियों ने बड़े पैमाने पर होने वाले पलायन के कारणों का व्यापक रूप से विश्लेषण किया है। उत्पीड़न कभी भी पलायन का प्राथमिक निर्धारक नहीं रहा है। मैं वास्तव में किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले इस पर कुछ डेटा देखना चाहूंगा।’’
बनर्जी ने इस बात से सहमति जताई कि पिछले कई दशकों में ढाका से संभ्रांत हिंदुओं के पलायन ने उस शहर में खान-पान की संस्कृति को बदल दिया, ठीक उसी तरह जैसा कोलकाता जैसे शहर में औसत बंगाली घरों में हुआ है।
यह अनुमान लगाया गया है कि करीब एक करोड़ पूर्वी बंगाली शरणार्थी 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत पलायन कर गए थे।
स्वतंत्रता के बाद के 77 वर्षों में, बांग्लादेश में हिंदू आबादी 22 प्रतिशत से घटकर 8 प्रतिशत से भी कम रह गई है। इसका मुख्य कारण बड़े पैमाने पर पलायन और अंतरिम अवधि के दौरान उत्पीड़न का हवाला देते हुए शरणार्थियों, जिनमें से अधिकतर हिंदू हैं, का लगातार सीमा पार कर (भारत) आना है।
बांग्लादेश, भारत के साथ 4,000 किलोमीटर से अधिक भूमि सीमा साझा करता है, जिसमें से आधे से अधिक पश्चिम बंगाल के साथ और शेष चार पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, असम, मेघालय और मिजोरम से होकर गुजरती है।
बनर्जी ने कहा, ‘‘1971 में बड़े पैमाने पर पलायन हुआ क्योंकि (वहां हुए संघर्ष में) कई देशों के सशस्त्र बल शामिल थे। मुझे नहीं लगता कि संकट की स्थिति नहीं रहने के दौरान पलायन उस स्तर तक कभी पहुंच सकता है।’’
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