संसदीय समिति ने जल जीवन मिशन के आंकड़ों की प्रामाणिकता पर चिंता जताई
वैभव माधव
- 11 Aug 2025, 06:19 PM
- Updated: 06:19 PM
नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) संसद की एक स्थायी समिति ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) की एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएमआईएस) में डाले जा रहे आंकड़ों की प्रामाणिकता पर चिंता जताई है और सिफारिश की है कि राज्यों द्वारा अपलोड किए गए आंकड़ों की पुष्टि की जाए।
समिति ने आगाह किया है कि विश्वसनीय आंकड़ों के बिना, जमीनी हकीकत का आकलन करना और ग्रामीण जलापूर्ति में कमियों को दूर करना मुश्किल बना रहेगा।
जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति ने कहा, ‘‘इस तथ्य से अवगत होने के कारण कि अपलोड की गई जानकारी की वास्तविक सत्यता वास्तविक जमीनी स्थिति को समझने और दिखाई देने वाली कमियों को पूरा करने के लिए आवश्यक है, समिति अपनी सिफारिश दोहराती है कि विभाग आईएमआईएस में डाले जा रहे आंकड़ों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए ईमानदारी से प्रयास करे।’’
सोमवार को संसद में पेश जल शक्ति मंत्रालय की 2024-25 की अनुदान मांगों पर अपनी छठी रिपोर्ट में, समिति ने कहा कि राज्य द्वारा अपलोड किए गए आंकड़ों का वास्तविक सत्यापन ‘वास्तविक जमीनी स्थिति को समझने के लिए आवश्यक’ है और पेयजल तथा स्वच्छता विभाग को ‘आंकड़ों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए ईमानदार प्रयास’ करने चाहिए।
हर घर जल योजना के कवरेज की धीमी गति को लेकर व्यापक चिंताओं के बीच समिति की यह समीक्षा सामने आई है।
वर्ष 2019 में जेजेएम के आरंभ के बाद से केवल 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पूर्ण घरेलू नल जल कनेक्शन हासिल किया है, और छह प्रमुख राज्य ओडिशा, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, केरल और राजस्थान राष्ट्रीय औसत से नीचे प्रदर्शन कर रहे हैं।
सरकार ने 100 प्रतिशत नल जल कवरेज प्रदान करने की समय सीमा 2028 तक बढ़ा दी है। प्रारंभिक समय सीमा 2024 थी।
स्वच्छता के मुद्दे पर, समिति ने सरकार से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत घरेलू शौचालयों के निर्माण के लिए 12,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि की समीक्षा करने का आग्रह किया और कहा कि निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद 2014 से इसमें कोई संशोधन नहीं किया गया है।
समिति ने बजटीय बाधाओं की ओर भी इशारा किया और कहा कि जल जीवन मिशन (जेजेएम) का 2024-25 का 70,162 करोड़ रुपये का आवंटन विभाग द्वारा मांगे गए 1 लाख करोड़ रुपये से काफी कम है।
भाषा वैभव