जनगणना 2027 : 82 लाख परिवारों ने स्व गणना की
राजकुमार जितेंद्र रवि कांत
- 01 May 2026, 10:53 PM
- Updated: 10:53 PM
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) वर्ष 2027 जनगणना के प्रारंभिक गृहसूचीकरण और आवास गणना (एचएलओ) चरण के दौरान अब तक लगभग 82 लाख परिवारों ने स्व-गणना सुविधा का लाभ उठाया है। शुक्रवार को जारी किये गये एक सरकारी बयान में यह जानकारी दी गयी।
बयान के अनुसार आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में,अधिसूचित 15 दिवसीय स्व-गणना अवधि की समाप्ति के बाद शुक्रवार को गणना कर्मियों ने एचएलओ के तहत क्षेत्र में जमीनी कामकाज शुरु किया।
यह अभियान 30 मई, 2026 तक चलेगा, जिसके दौरान प्रशिक्षित गणनाकर्मी घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे।
इस गृह सूचीकरण अभियान में, गणनाकर्मी प्रत्येक घर और इमारत का व्यक्तिगत रूप से दौरा करेंगे तथा नागरिकों से उनके घरों में उपलब्ध सुविधाओं, परिवार के मुखिया और सदस्यों के बारे में जानकारी, जैसे कि उनके नाम, लिंग और स्वामित्व की स्थिति आदि से संबंधित 33 प्रश्न पूछेंगे।
बयान में कहा गया है, "जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना आज से दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र, राजस्थान, महाराष्ट्र, मेघालय और झारखंड में भी शुरू हो गई है।"
इन क्षेत्रों में ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा 15 मई तक उपलब्ध रहेगी, जिसके बाद 16 मई से एक महीने का जमीनी अभियान शुरू होगा।
बयान में कहा गया है कि बिहार में अधिसूचित स्व-गणना अवधि शुक्रवार को समाप्त हो गई है और अब घर-घर जाकर सर्वेक्षण अभियान दो मई से शुरू होगा।
बयान में कहा गया है, "जनगणना 2027 में पहली बार शुरू की गई स्व-गणना के प्रति लोगों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। जनगणना 2027 के लिए अपनाई गई डिजिटल पद्धति के तहत, अब तक लगभग 82 लाख परिवारों ने आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से इस सुविधा का सफलतापूर्वक लाभ उठाया है।''
स्व-गणना के तहत, नागरिक पोर्टल पर आवश्यक विवरण भरकर और प्रश्नों के उत्तर देकर एक विशेष पहचान पत्र प्राप्त करेंगे, जिसे वे सत्यापन के लिए अपने घरों में आने वाले गणनाकर्ताओं को प्रदान करेंगे।
तेलंगाना और पंजाब में अधिसूचित कार्यक्रम के अनुसार स्व-गणना अभी जारी है।
बयान में कहा गया है, ''इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एनडीएमसी क्षेत्र और दिल्ली छावनी बोर्ड के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और उत्तराखंड में आवास और मकान गणना के तहत जमीनी अभियान चल रहे हैं।''
भाषा राजकुमार जितेंद्र रवि कांत
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