बिहार सरकार ने 'सहयोग शिविर' को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जारी किए नए दिशा-निर्देश
कैलाश रवि कांत
- 25 May 2026, 05:20 PM
- Updated: 05:20 PM
पटना, 25 मई (भाषा) बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए आयोजित किए जा रहे 'सहयोग शिविर' को अधिक जनहितैषी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सोमवार को कई दिशा-निर्देश जारी किए।
सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, पंचायत भवन अथवा अन्य उपयुक्त सरकारी भवन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में शिविरों के लिए अस्थायी मजबूत ढांचे की व्यवस्था की जाएगी। शिविरों में पेयजल, आवेदन लिखने के लिए कर्मी तथा इंटरनेट सुविधा से युक्त लैपटॉप और प्रिंटर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
यह शिविर प्रत्येक महीने के पहले और दूसरे मंगलवार को क्रमवार पंचायतों में आयोजित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर पहली बार शुरू की गई यह पहल राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी 'सात निश्चय-3' कार्यक्रम के तहत 'ईज ऑफ लिविंग' पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों को घर के पास ही सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है।
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्र ने 19 मई को राज्यभर में आयोजित 'सहयोग शिविर' के बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि शिविरों को और सुदृढ़ बनाने के लिए जिला से लेकर राज्य स्तर तक के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
ये निर्देश सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, पुलिस महानिदेशक, प्रमंडलीय आयुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों (आईजी), उप महानिरीक्षकों (डीआईजी), जिलाधिकारियों, वरीय पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को जारी किए गए हैं।
निर्देशों में कहा गया है कि भीषण गर्मी को देखते हुए शिविरों में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। साथ ही पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
शिविरों में पूर्व-मुद्रित प्रपत्र उपलब्ध रहेंगे, जिनमें आवेदक अपनी जानकारी भर सकेंगे और उन्हें पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। ऐसे लोगों की सहायता के लिए एक लिपिक भी तैनात किया जाएगा, जो आवेदन लिखने या भरने में सक्षम नहीं हैं।
अपर मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि गोपनीय शाखा कुछ आवेदकों से फोन पर यादृच्छिक प्रतिक्रिया प्राप्त करे, ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि उनकी शिकायतों का समाधान सही तरीके से हुआ है या नहीं।
यदि किसी मामले का आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर निस्तारण नहीं होता है, तो संबंधित प्रखंड स्तरीय अधिकारी के खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रखंड स्तर से नीचे कार्यरत उन कर्मियों पर भी कार्रवाई होगी, जो दायित्व निर्वहन में सहयोग के लिए जिम्मेदार हैं।
शिविरों में विभिन्न विभागों की केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से संबंधित प्रचार सामग्री की कमी पाए जाने पर सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी के सहयोग से फ्लेक्स और स्टैंडी तैयार कर शिविरों में प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पत्र में सभी सांसदों, विधायकों तथा जिला एवं प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समितियों के सदस्यों को भी शिविरों में आमंत्रित करने को कहा गया है।
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कैलाश रवि कांत
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