इंडोनेशिया को उन्नत मिसाइल देगा भारत, दोनों पक्ष शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत के लिए काम करने पर सहमत
अविनाश
- 07 Jul 2026, 07:44 PM
- Updated: 07:44 PM
जकार्ता, सात जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच मंगलवार को हुई बातचीत में भारत ने इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल की आपूर्ति पर सहमति जताई।
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने व शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी चर्चा की।
बढ़ती भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन क्षेत्रों में दुर्लभ खनिज और स्टील आपूर्ति शृंखला, समुद्री सुरक्षा, दवाएं, शिक्षा, अंतरिक्ष, शोध एवं नवोन्मेष, दूरसंचार और खाद्य सुरक्षा शामिल हैं।
इंडोनेशियाई नेता के साथ बातचीत के आखिर में मोदी ने कहा, "अब हमारे दोनों देशों के लिए एक सुनहरा दौर शुरू होने वाला है।"
मोदी सोमवार को जकार्ता पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। यह तीन देशों के उनके दौरे का पहला चरण है। वह ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड का भी दौरा करेंगे। इस यात्रा का मकसद 2018 की भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत व्यापार, सुरक्षा और दुर्लभ खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है।
अपने मीडिया बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने बातचीत और कूटनीति के जरिए "वैश्विक उथल-पुथल" से निपटने की अपनी अपील दोहराई और फलस्तीन मुद्दे पर 'द्वि-राष्ट्र समाधान' के लिए नयी दिल्ली के समर्थन पर जोर दिया।
मोदी और सुबियांतो के बीच बातचीत के बाद हुए समझौतों में एक समझौता तय संख्या में ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति और दूसरा 'अस्त्र' मिसाइलों से जुड़ा था।
शायद यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री की मौजूदगी में 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा के दो रक्षा निर्यात सौदों की घोषणा की गई।
पिछले साल 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान दोनों हथियार प्रणालियों ने अहम भूमिका निभाई थी।
इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल सौदा, वियतनाम और फिलीपीन के साथ इसी तरह के समझौते के बाद हुआ है।
मिसाइल समझौते और समुद्री सुरक्षा से जुड़े समझौते ऐसे समय हुए हैं, जब दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। चीन यह ताकत संसाधनों से भरपूर दक्षिण चीन सागर और उसके आसपास के इलाकों में दिखा रहा है।
दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समग्र स्थिति पर भी चर्चा की।
राष्ट्रपति सुबियांतो ने एक ऐसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर जोर दिया जो खुला और पारदर्शी हो, और जहां अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था का पालन हो।
मोदी ने कहा, "हिंद-प्रशांत को लेकर हमारे नजरिए में मजबूत तालमेल है। भारत ने हमेशा आसियान (दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का संगठन) की केंद्रीय भूमिका को खास अहमियत दी है।"
यह भी तय किया गया कि इंडोनेशिया भारत के 'इंटीग्रेटेड फ्यूज़न सेंटर – इंडियन ओशन रीजन' (आईएफसी-आईओआर) में एक संपर्क अधिकारी तैनात करेगा।
मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता भरोसा रक्षा, सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र में सहयोग को मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा, "आज हम रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग में आपसी सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।"
उन्होंने कहा, "हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और संरक्षा को बेहतर बनाने के लिए अब हमारे दोनों तटरक्षक बल मिलकर काम करेंगे। समुद्री मामलों से जुड़े दो करीबी देशों के तौर पर, हमने ब्ल्यू इकोनॉमी, बंदरगाहों के विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में भी अपना सहयोग और बढ़ाने का फैसला किया है।"
भारत और इंडोनेशिया रणनीतिक रूप से अहम सबांग बंदरगाह को मिलकर विकसित करने पर भी सहमत हुए; यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित है और भारत के ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से 100 मील (160 किलोमीटर) दूर है।
एक और अहम कदम उठाते हुए, भारत ने इंडोनेशिया में इस्पात, गिलट और दुर्लभ स्थायी चुंबकों के निर्माण में निवेश करने का फैसला किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''आज के युग में, प्रौद्योगिकी की आपूर्ति शृंखला का लचीलापन बहुत मायने रखता है। महत्वपूर्ण खनिजों और इस्पात के क्षेत्र में आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूती देने के लिए भी अहम समझौता हुआ है।''
उन्होंने कहा, ''हमारी कंपनियों के बीच इस्पात और दुर्लभ चुंबक को लेकर साझेदारी की नयी शुरुआत हो रही है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) जल्द ही इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली के साथ जुड़ जाएगा और इससे दोनों देशों के बीच कारोबार और यात्रा में आसानी होगी।
मोदी ने कहा, ''2018 में बनी हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी आज एक नयी उड़ान ले रही है। हम विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा.. हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं।''
उन्होंने कहा, ''मुझे विश्वास है, आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक सुनहरा अध्याय शुरू होगा।''
मोदी ने इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान-बेंगलुरु का एक परिसर स्थापित करने के निर्णय की भी घोषणा की।
दोनों पक्षों ने समुद्री अर्थव्यवस्था, समुद्री व्यापार और बंदरगाह विकास के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया।
भारत और इंडोनेशिया ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया। मोदी ने कहा, "हमने आज अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त शोध, प्रौद्योगिकी साझा करने और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण फैसले किए हैं।"
प्रधानमंत्री और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की।
मोदी ने कहा, ''वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारत का मानना है कि संवाद और कूटनीति की भूमिका, पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।''
उन्होंने कहा, ''फलस्तीन के विषय पर, हम द्वि-राष्ट्र समाधान और दीर्घकालिक शांति का समर्थन करते हैं।''
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "हमारे दोनों देश गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया की ऐतिहासिक यात्रा की 100वीं वर्षगांठ भी बड़े उत्साह के साथ मनाएंगे। इंडोनेशिया के राष्ट्र-निर्माण के शानदार सफर में दूरदर्शी शिक्षाविद और वहां के पहले शिक्षा मंत्री की हजर देवान्तारा का बहुत बड़ा योगदान है।"
मोदी ने कहा, "उनकी शिक्षा संबंधी सोच पर गुरुदेव टैगोर के विचारों का गहरा असर था। इस साझा बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए, भारत और इंडोनेशिया इस शताब्दी वर्ष को "सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति के टैगोर-देवान्तारा वर्ष' के तौर पर मनाएंगे।"
भाषा प्रशांत अविनाश
अविनाश
0707 1944 जकार्ता