पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ली; प्राथमिकी दर्ज
भाषा
- 21 Oct 2026, 11:41 AM
- Updated: 11:41 AM
नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई अधिकारियों की एक टीम हत्या के सभी पहलुओं की जांच के लिए पंजाब पहुंच चुकी है।
उन्होंने बताया कि एजेंसी ने विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित की है, जो मंगलवार रात मानसा पहुंची और मामले से जुड़े दस्तावेज उसे सौंपने के लिए पुलिस से औपचारिक रूप से लिखित अनुरोध किया।
टीम में औषधि नियंत्रक, फॉरेंसिक और वस्तु एंव सेवा कर (जीएसटी) विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि झोटा का परिवार बुधवार पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे मानसा सर्किट हाउस पहुंचेगा, जहां सीबीआई टीम उनसे पूछताछ करेगी और बयान दर्ज करेगी।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को घोषणा की थी कि इस घटना की जांच सीबीआई से कराई जाएगी।
मान ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ''हम मादक पदार्थ के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले परविंदर सिंह झोटा के पिता और उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए हम इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप रहे हैं। मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ हमारी जंग पूरी ताकत से जारी है। पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए हमें जो भी कड़े कदम उठाने पड़ेंगे, हम उनसे पीछे नहीं हटेंगे।''
झोटा के परिजन इस हत्याकांड की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे थे।
झोटा दवा की दुकानों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। उनकी 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित दवा की दुकान के भीतर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
झोटा की हत्या के मामले में दुकान मालिक अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया गया। कुमार पर आरोप है कि जब झोटा ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीले पदार्थ बेचने को लेकर उससे सवाल किया, तो उसने झोटा पर गोली चला दी।
इस घटना के बाद पंजाब में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं।
झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने के सात दिन बाद भी उनके शव का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। उनके परिजन एवं समर्थक इस बात पर अड़े हैं कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे।
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