वक्फ विधेयक पर बीजद के रुख में बदलाव को लेकर पटनायक से मिलेंगे पार्टी के वरिष्ठ नेता
प्रीति अविनाश
- 04 Apr 2025, 05:12 PM
- Updated: 05:12 PM
भुवनेश्वर, चार अप्रैल (भाषा) बीजू जनता दल (बीजद) के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर पार्टी के रुख में अचानक बदलाव को लेकर शुक्रवार को चिंता जाहिर की और कहा कि वे पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के समक्ष यह मुद्दा उठाएंगे।
राज्यसभा में बृहस्पतिवार देर रात वक्फ विधेयक को मंजूरी दिए जाने के कुछ घंटे बाद ओडिशा विधानसभा में बीजद के उपनेता प्रसन्ना आचार्य, पूर्व मंत्री भूपिंदर सिंह, अशोक पांडा, पूर्व सांसद चंद्रशेखर साहू और अन्य नेताओं ने पार्टी मुख्यालय शंख भवन में बैठक की और वक्फ विधेयक पर बीजद के रुख में बदलाव के मुद्दे पर चर्चा की।
दिलचस्प है कि राज्यसभा में वक्फ विधेयक पर मतदान से एक दिन पहले पार्टी ने कहा था कि वह इसके खिलाफ मतदान करेगी।
बीजद के राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता सस्मित पात्रा ने कहा कि उन्होंने वक्फ विधेयक के पक्ष में मतदान किया क्योंकि पार्टी ने इस मुद्दे पर कोई व्हिप जारी नहीं किया था।
पात्रा ने दावा किया कि उन्हें नहीं पता कि पार्टी के छह अन्य सांसदों ने भी विधेयक के समर्थन में मतदान किया है या नहीं।
बीजद के राज्यसभा में सात सदस्य हैं और लोकसभा में उसके एक भी सदस्य नहीं हैं।
पात्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं दूसरों के बारे में नहीं बता सकता, लेकिन मैंने विधेयक के समर्थन में मतदान किया है।’’
बैठक के बाद आचार्य ने कहा, ‘‘अन्य मुद्दों के अलावा हमने इस पर भी चर्चा की (वक्फ विधेयक पर बीजद के रुख में बदलाव)। हमें नहीं पता कि किन परिस्थितियों में पार्टी ने अपना रुख बदला। जैसा कि हम जानते हैं कि पटनायक की अध्यक्षता में आयोजित बीजद संसदीय दल की बैठक में वक्फ विधेयक का विरोध करने का फैसला किया गया था। हम इस मुद्दे पर बीजद के प्रमुख के साथ चर्चा करेंगे।’’
विपक्षी कांग्रेस ने बीजद की कड़ी आलोचना की और उस पर विधेयक के पक्ष में मतदान करके राज्य के मुस्लिम समुदाय से किए गए वादे के खिलाफ जाने का आरोप लगाया।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, ‘‘बीजद संसदीय दल ने विधेयक का विरोध करने का फैसला किया था। हमने यह भी सुना था कि पार्टी इस मुद्दे पर राज्यसभा में मतदान से दूर रहेगी लेकिन अचानक बीजद ने अपना रुख बदल दिया और विधेयक के समर्थन में मतदान किया। बीजद के फैसले से नवीन पटनायक और पार्टी की छवि खराब हुई है।’’
कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रमुख ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘पार्टी दिवंगत बीजू पटनायक की विचारधारा पर काम कर रही थी और नवीन बाबू भी धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करते थे, लेकिन अब वह पूरी तरह से भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इस प्रक्रिया में, उन्होंने (बीजद) खुद को भाजपा के रंग में रंग लिया। मुझे इस बात से हैरानी नहीं होगी अगर क्षेत्रीय पार्टी की विचारधारा में बदलाव होने के बाद बीजद का भाजपा में विलय हो जाता है।’’
भाषा प्रीति