भारत और श्रीलंका के बीच महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर
आशीष प्रशांत
- 05 Apr 2025, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
(फोटो के साथ)
(मानस प्रतिम भुइयां)
कोलंबो, पांच अप्रैल (भाषा) भारत और श्रीलंका ने पहली बार सैन्य क्षेत्र में गहन सहयोग के लिए एक ढांचे को संस्थागत बनाने के संबंध में शनिवार को प्रमुख रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई है और एक दूसरे पर निर्भर है।
यह महत्वपूर्ण समझौता श्रीलंका में भारतीय शांति रक्षा सेना (आईपीकेएफ) के हस्तक्षेप के लगभग चार दशक बाद हुआ है, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में बेहतरी का संकेत मिलता है।
प्रधानमंत्री मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने कुल सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने तथा पावर ग्रिड कनेक्टिविटी पर एक समझौता शामिल है।
त्रिपक्षीय ढांचे के तहत त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने से संबंधित समझौता में संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल है।
मोदी ने दोहराया कि भारत हमेशा श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा रहेगा, वहीं दिसानायके ने कहा कि श्रीलंका अपनी भूमि का इस्तेमाल किसी भी ऐसे तरीके से नहीं होने देगा जो भारत और क्षेत्र के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल हो।
बैठक में प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच मछुआरों के विवादास्पद मुद्दे को ‘‘मानवीय दृष्टिकोण’’ से सुलझाने की वकालत की और उम्मीद जताई कि श्रीलंका तमिल लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा और प्रांतीय परिषद के चुनाव कराएगा।
मीडिया में जारी अपने वक्तव्य में मोदी ने कहा कि भारत ने श्रीलंका की मदद के लिए पिछले छह महीनों में ही 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक के ऋण को अनुदान में परिवर्तित कर दिया है और देश को दिए गए ऋणों पर ब्याज दरें कम करने की घोषणा की है।
सात समझौतों के अलावा भारत ने श्रीलंका के लिए आर्थिक सहायता के एक हिस्से के रूप में ऋण पुनर्गठन समझौते को भी अंतिम रूप दिया। मोदी ने कहा कि इससे श्रीलंका के लोगों को तत्काल सहायता और राहत मिल सकेगी।
मोदी ने घोषणा की कि श्रीलंका के पूर्वी प्रांतों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए लगभग 2.4 अरब श्रीलंकाई रुपए का सहायता पैकेज प्रदान किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी का श्रीलंका की राजधानी के मध्य में स्थित ‘इंडीपेंडेंस स्क्वायर’ पर भव्य स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री मोदी को द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका के लिए ‘मित्र विभूषण’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। श्रीलंका का यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
मोदी-दिसानायके वार्ता में 10 से अधिक ठोस परिणाम सामने आए, रक्षा समझौते को रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह समझौते श्रीलंका में आईपीकेएफ के हस्तक्षेप के लगभग 35 साल बाद हुआ है जिससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के रक्षा संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं।
मोदी ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि हमारे सुरक्षा हित समान हैं। दोनों देशों की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई है और एक दूसरे पर निर्भर है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं भारत के हितों के प्रति राष्ट्रपति दिसानायके की संवेदनशीलता के लिए उनका आभारी हूं। हम रक्षा सहयोग के क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण समझौतों का स्वागत करते हैं।’’
श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा, ‘‘हमने दोनों देशों के बीच पहले से ही उत्कृष्ट रक्षा सहयोग में अपने सहयोग को और आगे बढ़ाने के बारे में भी विस्तार से चर्चा की।’’
दिसानायके ने अपने वक्तव्य में कहा, ‘‘मैंने श्रीलंका के इस रुख को फिर से दोहराया कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी ऐसे तरीके से करने की अनुमति नहीं देगा जो भारत की सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता के प्रतिकूल हो।’’
मोदी ने कहा कि भारत को एक सच्चे मित्रवत पड़ोसी के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करने पर गर्व है। उन्होंने कहा, ‘‘चाहे वह 2019 का आतंकवादी हमला हो, कोविड महामारी हो या हालिया आर्थिक संकट हो, हम हर कठिनाई के दौरान श्रीलंका के लोगों के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका में हस्तक्षेप के दौरान तैनात आईपीकेएफ के शहीद जवानों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
रक्षा समझौते को लेकर एक सवाल पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह एक व्यापक ढांचा है जो मौजूदा रक्षा सहयोग पहल को और अधिक व्यवस्थित बनाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा की पूरी तरह से परस्पर संबद्ध प्रकृति पर दोनों पक्षों के विचारों में करीबी समानता की बात भी की।
मिस्री ने कहा कि रक्षा समझौते से अधिक संयुक्त अभ्यास, क्षमता निर्माण, दोनों देशों की नौसेन्य इकाइयों की बंदरगाह यात्राओं में वृद्धि होगी तथा इससे दोनों पक्षों के बीच रक्षा उद्योग सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
अन्य उल्लेखनीय समझौतों में डिजिटल समाधान साझा करने के क्षेत्र में सहयोग तथा पूर्वी प्रांत के लिए भारत की बहु-क्षेत्रीय अनुदान सहायता पर समझौता शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिवर्ष 700 श्रीलंकाई लोगों के लिए एक व्यापक दक्षता विकास कार्यक्रम, त्रिंकोमाली में थिरुकोनेश्वरम मंदिर, नुवारा एलिया में सीता एलिया मंदिर और अनुराधापुरा में ‘सेक्रेड सिटी कॉम्प्लेक्स’ परियोजना के विकास के लिए भारत की अनुदान सहायता की भी घोषणा की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच संबंध आपसी विश्वास और सद्भावना पर आधारित हैं तथा दोनों पक्ष दोनों देशों के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।
मोदी ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति दिसानायके ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना और मुझे उनका पहला विदेशी मेहमान बनने का सौभाग्य मिला। यह हमारे विशेष संबंधों की गहराई का प्रतीक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘श्रीलंका का हमारी ‘पड़ोसी पहले नीति’ और ‘महासागर’ दृष्टिकोण दोनों में विशेष स्थान है। राष्ट्रपति दिसानायके की भारत यात्रा के बाद से पिछले चार महीनों में हमने अपने सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति की है।’’
मोदी ने हाल में मॉरीशस की यात्रा के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ भारत के जुड़ाव के लिए ‘महासागर’ या ‘क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति’ परिकल्पना की घोषणा की।
‘ग्लोबल साउथ’ का आशय दुनिया के कमजोर या आर्थिक रूप से कम संपन्न देशों से है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके ने सामपुर सौर ऊर्जा परियोजना का भी डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया।
मोदी ने कहा, ‘‘सामपुर सौर ऊर्जा संयंत्र श्रीलंका की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सहायक होगा। बहु-उत्पाद पाइपलाइन के निर्माण और त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए किए गए समझौतों से श्रीलंका के सभी लोगों को लाभ मिलेगा।’’
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ग्रिड अंतर-संपर्क समझौते से श्रीलंका के लिए बिजली निर्यात के विकल्प खुलेंगे। मोदी ने कहा कि भारत श्रीलंका की विशिष्ट डिजिटल पहचान परियोजना के लिए भी सहायता प्रदान करेगा।
अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने मछुआरों के मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमने मछुआरों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। हम इस बात पर सहमत हुए कि हमें इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। हमने मछुआरों और उनकी नावों की तत्काल छोड़ने पर भी जोर दिया।’’
तमिल मुद्दे का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी उम्मीद जताई कि श्रीलंका सरकार देश के संविधान को ‘‘पूरी तरह लागू’’ करेगी। मोदी ने कहा, ‘‘हमने श्रीलंका में पुनर्निर्माण और सुलह के बारे में भी बात की।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि श्रीलंका सरकार तमिल लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी और श्रीलंका के संविधान को पूरी तरह लागू करने तथा प्रांतीय परिषद चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करेगी।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी प्रांतों के तमिल नेताओं के एक समूह से मुलाकात की और समुदाय के कल्याण के लिए काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
श्रीलंका में तमिल समुदाय 13वें संशोधन के क्रियान्वयन की मांग कर रहा है, जो उन्हें सत्ता का हस्तांतरण प्रदान करता है। 13वां संशोधन 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद लाया गया था।
मोदी ने श्रीलंका को आर्थिक संकट से बाहर निकालने में भारत की सहायता के बारे में भी बात की।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले छह महीनों में ही हमने 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक के ऋणों को अनुदान में बदल दिया है। हमारा द्विपक्षीय ‘ऋण पुनर्गठन समझौता’ श्रीलंका के लोगों को तत्काल सहायता और राहत प्रदान करेगा। आज हमने ब्याज दरें कम करने का भी फैसला किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह इस बात का प्रतीक है कि आज भी भारत श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा है।’’
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच बौद्ध संबंधों के बारे में भी बात की। मोदी ने कहा, ‘‘मुझे यह घोषणा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि मेरे गृह राज्य गुजरात के अरावली क्षेत्र में 1960 में मिले भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को प्रदर्शनी के लिए श्रीलंका भेजा जा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत त्रिंकोमाली में थिरुकोनेश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार में सहायता करेगा। भारत अनुराधापुरा महाबोधि मंदिर परिसर में पवित्र शहर और नुवारा एलिया में सीता एलिया मंदिर के निर्माण में भी सहायता प्रदान करेगा।’’
मोदी बैंकॉक की यात्रा के बाद शुक्रवार शाम कोलंबो पहुंचे थे। उन्होंने बैंकॉक में बिम्सटेक (बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) के शिखर सम्मेलन में भाग लिया था।
भाषा आशीष